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जनरल धीरज सेठ ने बताया आत्मनिर्भर रक्षा का महत्व

Ratna Netam
27 Sept 2026 3:02 PM IST
जनरल धीरज सेठ ने बताया आत्मनिर्भर रक्षा का महत्व
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नई दिल्ली। आर्मी चीफ (COAS) जनरल धीरज सेठ ने रविवार को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि देश के लिए अपनी स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करना रणनीतिक रूप से बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी संघर्ष में जमीन हमेशा सफलता का एकमात्र ठोस पैमाना बनी रहेगी, क्योंकि जीत को आखिरकार क्षेत्र के आधार पर ही मापा जाता है। इसके साथ ही उन्होंने बदलती युद्ध परिस्थितियों और आधुनिक तकनीक की बढ़ती भूमिका को लेकर भी अपनी बात रखी।NDTV डिफेंस समिट 2026 को संबोधित करते हुए जनरल सेठ ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की रणनीतिक जरूरत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल देश में रक्षा उपकरण तैयार करना नहीं है, बल्कि ऐसी क्षमता विकसित करना भी है जिससे जरूरत के समय किसी दूसरे देश की मदद या सप्लाई पर निर्भर हुए बिना लंबे समय तक अपनी स्थिति को बनाए रखा जा सके।
जनरल सेठ ने कहा, "आत्मनिर्भरता का मतलब यह पक्का करना है कि हम दूसरों की मदद या सप्लाई पर निर्भर हुए बिना डटे रहने की क्षमता रखें। यह हमें अपनी स्वदेशी क्षमता के रास्तों पर गंभीरता से विचार करने का एक ठोस कारण देता है।"आर्मी चीफ ने अपने संबोधन में आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नई तकनीक लड़ाइयों की अवधि को कम कर सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि युद्ध भी छोटा हो जाएगा। उनके अनुसार संघर्ष की अवधि लगातार अनिश्चित होती जा रही है। ऐसी परिस्थितियों में किसी देश के लिए अपनी सैन्य जरूरतों को पूरा करने की स्वतंत्र क्षमता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
उनकी टिप्पणी से रक्षा उत्पादन में घरेलू क्षमताओं के महत्व पर जोर सामने आया। किसी लंबे संघर्ष की स्थिति में सैन्य उपकरणों, जरूरी संसाधनों और अन्य रक्षा आवश्यकताओं की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में बाहरी आपूर्ति पर निर्भरता को कम करने और स्वदेशी उत्पादन क्षमता को मजबूत करने को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।जनरल सेठ ने जमीन के महत्व पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत हो जाए, जमीन सफलता का ठोस पैमाना बनी रहेगी। उनके मुताबिक जीत को क्षेत्र के आधार पर मापा जाता है। आधुनिक युद्ध में तकनीक की भूमिका बढ़ने के बावजूद जमीनी स्थिति का महत्व बना रहता है।आज के दौर में युद्ध के स्वरूप में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। नई तकनीकों के कारण सैन्य अभियानों की गति और तरीके बदल रहे हैं। जनरल सेठ ने इसी बदलाव की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि तकनीक लड़ाइयों को छोटा कर रही है, लेकिन युद्ध की अवधि निश्चित नहीं होती। संघर्ष कितने समय तक चलेगा, इसका पहले से अनुमान लगाना कठिन होता जा रहा है।
ऐसी स्थिति में आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक या औद्योगिक लक्ष्य नहीं रह जाती, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन जाती है। यदि संघर्ष लंबा चलता है तो किसी भी देश को लगातार रक्षा सामग्री और आवश्यक संसाधनों की जरूरत पड़ सकती है। जनरल सेठ के मुताबिक यही कारण है कि अपनी स्वदेशी क्षमता विकसित करने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य देश की सैन्य जरूरतों को घरेलू स्तर पर पूरा करने की क्षमता बढ़ाने से जुड़ा है। इससे बाहरी सप्लाई में किसी तरह की बाधा आने की स्थिति में भी जरूरी सैन्य आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता मजबूत हो सकती है। आर्मी चीफ ने अपने संबोधन में इसी रणनीतिक जरूरत को प्रमुखता से सामने रखा।उन्होंने संकेत दिया कि आधुनिक युद्ध केवल तकनीकी श्रेष्ठता तक सीमित नहीं है। तकनीक युद्ध के तरीके को बदल सकती है और किसी विशेष लड़ाई को कम समय में निर्णायक मोड़ तक पहुंचाने में भूमिका निभा सकती है, लेकिन व्यापक संघर्ष की अवधि कई दूसरे कारकों पर निर्भर कर सकती है। यही अनिश्चितता रक्षा तैयारियों को और महत्वपूर्ण बनाती है।
जनरल सेठ के संबोधन का प्रमुख संदेश यह रहा कि देश को ऐसी रक्षा व्यवस्था तैयार करनी होगी जो बाहरी मदद पर अत्यधिक निर्भर न हो। उन्होंने आत्मनिर्भरता को उस क्षमता से जोड़ा जिसके जरिए देश जरूरत पड़ने पर अपनी सैन्य स्थिति को बनाए रख सके और आवश्यक रक्षा आपूर्ति के लिए दूसरों पर निर्भरता कम कर सके।आर्मी चीफ ने स्वदेशी क्षमता के रास्तों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता बताई। रक्षा उत्पादन की घरेलू व्यवस्था मजबूत होने से देश को अपनी जरूरतों के अनुरूप उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। लंबे समय तक चलने वाले किसी संघर्ष की स्थिति में ऐसी क्षमता विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आधुनिक तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बावजूद जमीन की भूमिका समाप्त नहीं होती। युद्ध के अलग-अलग क्षेत्रों में तकनीकी बदलाव तेजी से हो सकते हैं, लेकिन अंततः किसी संघर्ष में क्षेत्रीय स्थिति भी महत्वपूर्ण रहती है। इसी संदर्भ में उन्होंने जमीन को सफलता का ठोस पैमाना बताया।NDTV डिफेंस समिट 2026 में दिया गया जनरल सेठ का संबोधन मुख्य रूप से तीन पहलुओं पर केंद्रित रहा—रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता, युद्ध में जमीन का महत्व और तकनीक के कारण बदलता संघर्ष का स्वरूप। उन्होंने इन तीनों को भविष्य की रक्षा तैयारियों से जोड़ते हुए स्वदेशी क्षमता को मजबूत करने की जरूरत बताई।
कुल मिलाकर आर्मी चीफ जनरल धीरज सेठ ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को रणनीतिक आवश्यकता के रूप में सामने रखा। उनका कहना है कि देश को ऐसी क्षमता विकसित करनी चाहिए जिससे किसी संघर्ष के दौरान बाहरी मदद या सप्लाई पर निर्भर हुए बिना अपनी स्थिति बनाए रखी जा सके। साथ ही उन्होंने कहा कि तकनीक लड़ाइयों की अवधि को प्रभावित कर सकती है, लेकिन युद्ध की अवधि लगातार अनिश्चित होती जा रही है और जमीन आगे भी सफलता का ठोस पैमाना बनी रहेगी।
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