ग्रीन कॉरिडोर ने दी नई उम्मीद, सर गंगा राम अस्पताल से IGI एयरपोर्ट तक सफल रहा ऑपरेशन
दिल्ली में फिर बना ग्रीन कॉरिडोर, ट्रैफिक पुलिस की त्वरित कार्रवाई पर परिजनों ने जताया आभार
नई दिल्ली : दिल्ली में एक बार फिर ट्रैफिक पुलिस की तत्परता और बेहतरीन समन्वय ने यह साबित कर दिया कि समय पर लिया गया सही फैसला किसी की जिंदगी बचा सकता है। राजधानी के प्रतिष्ठित सर गंगा राम अस्पताल से इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट तक बनाए गए विशेष ग्रीन कॉरिडोर ने एक गंभीर चिकित्सा अभियान को सफल बनाया। रियल-टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग, विभिन्न ट्रैफिक सर्किलों के बीच तेज समन्वय और पुलिसकर्मियों की मुस्तैदी की वजह से मरीज या अंग (ऑर्गन) को तय समय में एयरपोर्ट तक पहुंचाया जा सका।
इस सफल अभियान के बाद मरीज के परिजनों ने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और संबंधित एजेंसियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी त्वरित कार्रवाई ने उनके परिवार को नई उम्मीद दी है।
क्या था पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, सर गंगा राम अस्पताल से एक अत्यंत महत्वपूर्ण मेडिकल मिशन के तहत मरीज अथवा प्रत्यारोपण के लिए आवश्यक अंग को IGI एयरपोर्ट तक पहुंचाना था। चिकित्सा विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसे मामलों में हर मिनट कीमती होता है क्योंकि अंगों की सुरक्षित उपयोग अवधि सीमित होती है और मरीज की हालत भी लगातार गंभीर बनी रहती है।
इसी संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने तुरंत ग्रीन कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया। इसके लिए कंट्रोल रूम से लेकर सड़क पर तैनात पुलिसकर्मियों तक सभी को अलर्ट किया गया। पूरे मार्ग की निगरानी सीसीटीवी कैमरों, वायरलेस नेटवर्क और रियल-टाइम ट्रैफिक अपडेट के जरिए की गई।
क्या होता है ग्रीन कॉरिडोर?
ग्रीन कॉरिडोर एक विशेष ट्रैफिक व्यवस्था होती है, जिसके तहत किसी एम्बुलेंस या मेडिकल वाहन के लिए सड़क को पूरी तरह खाली कराया जाता है ताकि वह बिना किसी रुकावट के अपने गंतव्य तक पहुंच सके।
इस दौरान—
ट्रैफिक सिग्नल नियंत्रित किए जाते हैं।
प्रमुख चौराहों पर पुलिस पहले से तैनात रहती है।
वैकल्पिक मार्गों पर सामान्य वाहनों को डायवर्ट किया जाता है।
कंट्रोल रूम लगातार पूरे रूट की निगरानी करता है।
किसी भी जाम की स्थिति बनने से पहले उसे हटाने की व्यवस्था की जाती है।
यही वजह है कि ऐसे अभियानों में यात्रा का समय सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम हो जाता है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने इस अभियान में आधुनिक तकनीक का भी भरपूर उपयोग किया। कंट्रोल रूम से लगातार वाहन की लोकेशन पर नजर रखी गई। जैसे-जैसे एम्बुलेंस आगे बढ़ती गई, वैसे-वैसे अगले चौराहे और ट्रैफिक प्वाइंट को पहले ही अलर्ट कर दिया गया।
वायरलेस संचार प्रणाली के जरिए सभी अधिकारी लगातार संपर्क में रहे। यदि किसी स्थान पर अचानक वाहनों की संख्या बढ़ती दिखाई दी तो तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था लागू कर दी गई। इस समन्वय की वजह से वाहन को कहीं भी रुकना नहीं पड़ा।
मिनटों में पूरा हुआ सफर
सामान्य परिस्थितियों में सर गंगा राम अस्पताल से IGI एयरपोर्ट तक पहुंचने में ट्रैफिक के आधार पर काफी समय लग सकता है। लेकिन ग्रीन कॉरिडोर बनाए जाने के कारण मेडिकल वाहन तय समय से पहले एयरपोर्ट पहुंच गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंग प्रत्यारोपण जैसे मामलों में कुछ मिनटों की बचत भी मरीज के जीवन और मृत्यु के बीच अंतर पैदा कर सकती है।
डॉक्टरों ने भी की सराहना
अस्पताल से जुड़े चिकित्सकों ने ट्रैफिक पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि मेडिकल टीम अपना काम तभी पूरी दक्षता से कर पाती है, जब प्रशासन और पुलिस का सहयोग समय पर मिले।
डॉक्टरों के अनुसार—
अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया समयबद्ध होती है।
हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।
सुरक्षित और तेज परिवहन से सफलता की संभावना बढ़ जाती है।
परिजनों ने जताया आभार
सफल अभियान के बाद मरीज के परिजनों ने भावुक होकर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, अस्पताल प्रशासन और मेडिकल टीम का धन्यवाद किया। उनका कहना था कि जिस तेजी से सभी एजेंसियों ने मिलकर काम किया, उससे उन्हें उम्मीद मिली और जीवन बचाने का यह प्रयास सफल हो सका।
परिजनों ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने केवल अपनी ड्यूटी नहीं निभाई बल्कि मानवता का परिचय भी दिया।
दिल्ली में पहले भी बन चुके हैं कई ग्रीन कॉरिडोर
राष्ट्रीय राजधानी में इससे पहले भी कई बार ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अंग प्रत्यारोपण और गंभीर मरीजों के परिवहन को सफल बनाया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस समय-समय पर अस्पतालों, एयरपोर्ट, स्वास्थ्य विभाग और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर ऐसे अभियान संचालित करती रही है।
इन अभियानों की सफलता का मुख्य आधार है—
तेज निर्णय क्षमता
आधुनिक ट्रैफिक मॉनिटरिंग
प्रशिक्षित पुलिसकर्मी
अस्पतालों के साथ समन्वय
रियल-टाइम संचार व्यवस्था
तकनीक ने आसान बनाया मिशन
अब ट्रैफिक प्रबंधन केवल सड़क पर मौजूद पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रह गया है। आधुनिक कंट्रोल रूम, सीसीटीवी नेटवर्क, जीपीएस ट्रैकिंग और डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम की मदद से पूरे मार्ग पर लगातार नजर रखी जाती है।
यही कारण है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में प्रशासन तुरंत प्रतिक्रिया देने में सक्षम होता है।
ग्रीन कॉरिडोर क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
विशेषज्ञों के अनुसार ग्रीन कॉरिडोर का सबसे बड़ा उद्देश्य जीवन बचाना है। विशेष रूप से—
हार्ट ट्रांसप्लांट
लिवर ट्रांसप्लांट
किडनी ट्रांसप्लांट
फेफड़ों के प्रत्यारोपण
गंभीर मरीजों के आपातकालीन स्थानांतरण
जैसे मामलों में यह व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण साबित होती है।
प्रशासन और जनता की साझी जिम्मेदारी
ट्रैफिक विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी सड़क पर एम्बुलेंस या ग्रीन कॉरिडोर से जुड़ा वाहन दिखाई दे, तब आम लोगों को भी सहयोग करना चाहिए। वाहन को रास्ता देना केवल कानूनी जिम्मेदारी नहीं बल्कि मानवीय कर्तव्य भी है।