Delhi दिल्ली हाई कोर्ट ने एक यात्री पर 30,000 रुपये का जुर्माना लगाया है, क्योंकि उसने सोशल मीडिया पर गलत दावा किया था कि उसकी फ़्लाइट "हाईजैक" (अपहरण) कर ली गई है। कोर्ट ने माना कि कोई अप्रिय घटना नहीं हुई थी और यात्री ने अपनी गलती तुरंत सुधार ली थी। इसके आधार पर, उसके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया गया, लेकिन शर्त यह थी कि उसे जुर्माने की रकम दो हफ़्ते के अंदर दिल्ली हाई कोर्ट कर्मचारी कल्याण कोष में जमा करनी होगी।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस सौरभ बनर्जी की सिंगल बेंच ने की। याचिकाकर्ता, मोती सिंह राठौर ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग की थी। यह मामला 2023 का है, जब खराब मौसम के कारण दुबई से जयपुर जाने वाली स्पाइसजेट की फ़्लाइट को दिल्ली डायवर्ट कर दिया गया था, जिससे यात्रियों को लगभग छह घंटे की देरी हुई थी।
राठौर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए और नागरिक उड्डयन मंत्री को टैग करते हुए गलती से लिखा, "दुबई-जयपुर फ़्लाइट हाईजैक हो गई है।" यात्री को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने एक घंटे के भीतर सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगते हुए पोस्ट को ठीक कर लिया। उसने कहा कि उसे अंग्रेज़ी की कम जानकारी है और देरी पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए उसने गलती से "हाईजैक" शब्द का इस्तेमाल किया था। उसने स्पष्ट किया कि फ़्लाइट में केवल देरी हुई थी और उसे हाईजैक नहीं किया गया था।
उसके पोस्ट के बाद, भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत उसके खिलाफ FIR दर्ज की गई, जिसमें अफवाह फैलाने, गलत तरीके से रोकने और आपराधिक धमकी देने से संबंधित धाराएं शामिल थीं। सुनवाई के दौरान, यात्री के वकील ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल का मकसद घबराहट पैदा करना नहीं था। उन्होंने कहा कि यह गलती भाषा की सीमित जानकारी और देरी के कारण हुई निराशा का नतीजा थी।
अपने आदेश में, कोर्ट ने कहा कि "हाईजैक" जैसे संवेदनशील शब्द के इस्तेमाल के गंभीर परिणाम हो सकते थे। हालांकि, इस मामले में कोई वास्तविक नुकसान या अप्रिय घटना नहीं हुई थी। कोर्ट ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, वह युवा था, अंग्रेज़ी भाषा पर उसकी पकड़ सीमित थी और उसने अपनी गलती को तुरंत स्वीकार कर उसे सुधार लिया था। 4 अगस्त के अपने आदेश में, हाई कोर्ट ने FIR रद्द कर दी, लेकिन स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर ऐसी गलत और भ्रामक जानकारी साझा करना एक गंभीर मामला है। जुर्माने के साथ-साथ, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को भविष्य में ऐसी लापरवाही से बचने की चेतावनी भी दी।