Delhi : दिल्ली के एक स्कूल में पढ़ने वाले पांचवीं कक्षा के छात्र के साथ कथित तौर पर करीब छह महीने तक यौन शोषण किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने पॉक्सो (POCSO) एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, बच्चे के परिजनों की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जा रही है और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है।
छह महीने तक शोषण का आरोप
शिकायत के अनुसार, छात्र के साथ कथित तौर पर पिछले छह महीने से यौन शोषण किया जा रहा था। जब बच्चे ने परिजनों को पूरी घटना बताई, तब मामला पुलिस तक पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए केस दर्ज कर लिया।
पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुआ मामला
मामले में बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। यह कानून 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान करता है।
पुलिस जांच में जुटी
पुलिस ने बताया कि बच्चे का बयान नियमानुसार दर्ज किया जा रहा है और आवश्यक चिकित्सकीय एवं कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
स्कूल प्रशासन की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि कथित घटनाएं किन परिस्थितियों में हुईं और क्या स्कूल प्रशासन को इसकी कोई जानकारी थी। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावकों, शिक्षकों और स्कूल प्रशासन को बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर सतर्क नजर रखनी चाहिए और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना देनी चाहिए।
पीड़ित की पहचान गोपनीय रखना कानूनी दायित्व
पॉक्सो कानून के तहत यौन अपराध से जुड़े मामलों में पीड़ित बच्चे की पहचान सार्वजनिक करना प्रतिबंधित है। इसलिए उसकी पहचान उजागर करने वाली किसी भी जानकारी को साझा नहीं किया जा सकता।
Tags: