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दिल्ली नवजात तस्करी केस: साकेत कोर्ट की सख्त टिप्पणी, बच्चों की खरीद-फरोख्त पर जताई चिंता

nidhi
5 Aug 2026 6:25 AM IST
दिल्ली नवजात तस्करी केस: साकेत कोर्ट की सख्त टिप्पणी, बच्चों की खरीद-फरोख्त पर जताई चिंता
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नवजात तस्करी केस में अदालत का बड़ा संदेश

Delhi : दिल्ली की साकेत कोर्ट ने नवजात शिशुओं की तस्करी से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि "बच्चों की तस्करी सभ्य समाज की नैतिक अंतरात्मा पर सीधा हमला है।" अदालत ने इस अपराध को केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि मानवता और सामाजिक मूल्यों के खिलाफ गंभीर अपराध बताया।

कोर्ट ने कहा कि नवजात शिशु समाज का सबसे असहाय वर्ग होते हैं और उनकी खरीद-फरोख्त जैसी घटनाएं मानव गरिमा, संवैधानिक मूल्यों और बच्चों के अधिकारों का घोर उल्लंघन हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।
नवजात तस्करी मामले में अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान साकेत कोर्ट ने कहा कि बच्चों की तस्करी एक संगठित और अमानवीय अपराध है, जो समाज की नैतिक चेतना को झकझोर देता है। अदालत ने कहा कि इस तरह के अपराधों से न केवल पीड़ित बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ता है, बल्कि समाज की संवेदनशीलता और कानून के शासन पर भी सवाल खड़े होते हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि नवजात शिशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
"बच्चे कोई वस्तु नहीं हैं"
अदालत ने अपने अवलोकन में कहा कि नवजात बच्चों को किसी वस्तु की तरह खरीदना या बेचना मानव गरिमा के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। ऐसे अपराधों में शामिल लोगों के प्रति सख्त कानूनी कार्रवाई आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
तस्करी के नेटवर्क पर चिंता
कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि बच्चों की तस्करी अक्सर संगठित गिरोहों के जरिए की जाती है। ऐसे मामलों में पुलिस और जांच एजेंसियों को पूरे नेटवर्क की पहचान कर सभी दोषियों तक पहुंचना चाहिए, ताकि केवल बिचौलियों ही नहीं बल्कि पूरे गिरोह के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
अदालत ने कहा कि भारतीय कानून और किशोर न्याय से जुड़े प्रावधान बच्चों के सर्वोत्तम हितों की रक्षा के लिए बनाए गए हैं। इसलिए नवजात शिशुओं की तस्करी जैसे मामलों में कानून का सख्ती से पालन होना चाहिए।
कोर्ट ने जांच एजेंसियों को निष्पक्ष और व्यापक जांच करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया ताकि अपराध की पूरी सच्चाई सामने आ सके।
समाज को भी निभानी होगी जिम्मेदारी
साकेत कोर्ट ने कहा कि केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। समाज को भी जागरूक होकर ऐसे अपराधों की सूचना संबंधित अधिकारियों को देनी चाहिए। अस्पतालों, दत्तक ग्रहण संस्थाओं और बाल संरक्षण से जुड़े सभी संस्थानों को सतर्क रहने की जरूरत है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि का समय रहते पता लगाया जा सके।
बाल अधिकारों की रक्षा पर जोर
अदालत ने दोहराया कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण, पहचान, परिवार और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है। नवजात शिशुओं की तस्करी इन सभी अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। ऐसे मामलों में त्वरित जांच, प्रभावी अभियोजन और दोषियों को कड़ी सजा ही समाज में कानून का भरोसा मजबूत कर सकती है।
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