दिल्ली हाट में सजा देशभर का हुनर शरद शिल्पोत्सव में दिखेगी अनोखी कला
भारत की पारंपरिक कला
नई दिल्ली: देश के अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक हस्तकला और शिल्प को एक मंच पर लाने के लिए दिल्ली हाट आईएनए में ‘शरद शिल्पोत्सव 2.0’ की शुरुआत हो गई है। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय की ओर से आयोजित यह उत्सव 15 सितंबर तक चलेगा। यहां आने वाले लोग देशभर के कारीगरों की बनाई वस्तुओं को देखने के साथ सीधे उनसे खरीदारी भी कर सकेंगे। शिल्पोत्सव में भारत की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक कारीगरी की झलक देखने को मिल रही है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए कारीगर अपने-अपने क्षेत्र की विशेष हस्तशिल्प कला और उत्पाद प्रदर्शित कर रहे हैं। इसका उद्देश्य पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा देने के साथ कारीगरों को ग्राहकों तक सीधे पहुंचने के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है।
देशभर के कारीगर पहुंचे दिल्ली हाट
शरद शिल्पोत्सव 2.0 में करीब 100 कारीगर और शिल्पकार हिस्सा ले रहे हैं। इसमें जम्मू-कश्मीर से लेकर तमिलनाडु और पूर्वोत्तर राज्यों तक के हस्तशिल्प उत्पाद शामिल किए गए हैं। अलग-अलग स्टॉल पर हाथ से तैयार कपड़े, सजावटी वस्तुएं, पारंपरिक आभूषण और घरेलू उपयोग की कलात्मक वस्तुएं लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। मेले में जम्मू-कश्मीर की पश्मीना शॉल और पेपर माचे, पंजाब की फुलकारी, उत्तर प्रदेश की चिकनकारी और जरी-जरदोजी जैसे पारंपरिक शिल्प देखने को मिल रहे हैं। इसके अलावा राजस्थान की ब्लू पॉटरी और चमड़े से बनी वस्तुएं तथा मध्य प्रदेश की जनजातीय कला भी उत्सव की विविधता को बढ़ा रही हैं।
पूर्वोत्तर की कला भी बनी आकर्षण
शिल्पोत्सव में पूर्वोत्तर भारत की पारंपरिक कारीगरी को भी प्रमुखता दी गई है। असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के बांस तथा बेंत से तैयार उत्पादों के साथ स्थानीय हस्तनिर्मित वस्तुएं प्रदर्शित की जा रही हैं। वहीं दक्षिण भारत से आई पारंपरिक कलाकृतियां भी दिल्लीवासियों को देश के अलग-अलग हिस्सों की कला से परिचित करा रही हैं।
कारीगरों को सीधे मिलेगा बाजार
इस आयोजन की खासियत यह है कि ग्राहक सीधे शिल्पकारों से उत्पाद खरीद सकते हैं। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होती है और कारीगरों को अपनी मेहनत का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ती है। साथ ही ग्राहकों को किसी उत्पाद के पीछे की कला, उसे तैयार करने की तकनीक और उससे जुड़ी परंपरा के बारे में स्वयं कारीगरों से जानने का अवसर मिलता है। दिल्ली हाट लंबे समय से देश की हस्तशिल्प और क्षेत्रीय संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले प्रमुख स्थलों में शामिल है। ‘शरद शिल्पोत्सव 2.0’ इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आधुनिक बाजार और सदियों पुरानी भारतीय कारीगरी के बीच एक सेतु का काम कर रहा है। 15 सितंबर तक चलने वाला यह आयोजन खरीदारी के साथ देश की सांस्कृतिक और कलात्मक विविधता को करीब से देखने का भी अवसर दे रहा है।