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तिब्बत आपदा की सच्चाई दबाने के आरोप चीन ने हटवाए वीडियो

nidhi
2 Sept 2026 6:44 AM IST
तिब्बत आपदा की सच्चाई दबाने के आरोप चीन ने हटवाए वीडियो
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चीन छिपा रहा मौतों का आंकड़ा

बीजिंग/तिब्बत: नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद चीन पर आपदा की असली तस्वीरें छिपाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि तिब्बती लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो और तस्वीरें तेजी से हटाई जा रही हैं, जबकि सरकारी मीडिया केवल राहत और बचाव अभियान की चुनिंदा फुटेज दिखा रहा है। 26 अगस्त को ग्लेशियर ध्वस्त होने के बाद आई बाढ़ ने तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र और नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। नेपाल ने लगातार मौतों और लापता लोगों के आंकड़े सार्वजनिक किए, लेकिन चीन ने लंबे समय तक तिब्बत में सीमित जानकारी ही जारी की। इस अंतर ने बीजिंग की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सोशल मीडिया से गायब हो रहे वीडियो
रिपोर्टों के अनुसार, तिब्बती स्थानीय लोगों ने ग्यिरोंग पोर्ट, बहते गांवों और मलबे में दबे इलाकों के कई वीडियो चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए थे। इनमें से कई पोस्ट कुछ ही घंटों में हटा दिए गए। विदेशी पत्रकारों को भी प्रभावित क्षेत्र में पहुंचने की अनुमति नहीं दी जा रही है, जिससे स्वतंत्र रूप से हालात की पुष्टि करना मुश्किल हो गया है।
मौतों के आंकड़ों पर भी विवाद
चीन की आधिकारिक रिपोर्ट में तिब्बत में 16 मौतें और 546 लोगों के लापता होने की बात कही गई है। वहीं मानवाधिकार संगठनों और तिब्बती समूहों का दावा है कि वास्तविक नुकसान इससे कहीं अधिक हो सकता है, क्योंकि कई गांव पूरी तरह तबाह हो चुके हैं और प्रभावित इलाकों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही।
'फर्जी आंकड़े' बताकर कार्रवाई
चीनी सरकार ने ऑनलाइन मौतों के बड़े आंकड़े साझा करने वाले कम से कम 10 लोगों पर कार्रवाई की है। पुलिस का कहना है कि उन्होंने "अफवाहें" फैलाईं और लोगों को गुमराह किया, जबकि आलोचकों का आरोप है कि यह कदम वास्तविक स्थिति पर चर्चा दबाने के लिए उठाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तिब्बत जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सूचना पर कड़ा नियंत्रण राहत कार्यों की पारदर्शिता को प्रभावित करता है। फिलहाल चीन बचाव अभियान जारी होने की बात कह रहा है, लेकिन तबाही की पूरी तस्वीर अब भी दुनिया की नजरों से काफी हद तक ओझल है।
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