जम्मू। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज विभाग के एक फायरमैन को कथित रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया है। आरोपी पर कटरा स्थित एक होटल के लिए फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज की नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी NOC जारी कराने की प्रक्रिया के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। CBI ने जाल बिछाकर आरोपी को शिकायतकर्ता से 15 हजार रुपये कथित रूप से लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा।मामला 6 अक्टूबर को सामने आया, जब CBI ने एक शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि फायरमैन ने कटरा में स्थित उसके होटल की फायर NOC को प्रोसेस करने और जारी करने के एवज में 40 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। बाद में बातचीत के दौरान कथित रिश्वत की रकम घटाकर 15 हजार रुपये तय की गई।
CBI अधिकारियों के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद आरोपों की प्राथमिक जांच की गई और इसके बाद ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई गई। एजेंसी ने शिकायतकर्ता के साथ समन्वय कर आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी। तय योजना के अनुसार जब आरोपी ने शिकायतकर्ता से 15 हजार रुपये की राशि मांगी और स्वीकार की, तभी CBI की टीम ने उसे मौके पर पकड़ लिया।कुछ रिपोर्टों में आरोपी की पहचान नितीश सिंह जमवाल के रूप में की गई है। वह उधमपुर में असिस्टेंट डायरेक्टर, फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज के कार्यालय में फायरमैन के पद पर तैनात बताया गया है। CBI ने गिरफ्तारी के बाद मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है।
यह मामला फायर सेफ्टी NOC जैसी जरूरी प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ा है। होटल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और कई अन्य संस्थानों के संचालन के लिए अग्नि सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन जरूरी होता है। संबंधित विभाग द्वारा निरीक्षण और आवश्यक औपचारिकताओं के बाद ही फायर NOC जारी की जाती है। ऐसे में इस प्रक्रिया के बदले रिश्वत मांगने के आरोप को गंभीर माना जा रहा है।शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसके होटल की NOC प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आरोपी ने शुरुआत में 40 हजार रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता ने इस कथित मांग के बाद CBI से संपर्क किया। एजेंसी ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज करते हुए आगे की कार्रवाई की। बातचीत के बाद आरोपी के 15 हजार रुपये स्वीकार करने पर सहमत होने की बात CBI के बयान में कही गई है।
CBI ने 6 अक्टूबर को ही ट्रैप ऑपरेशन अंजाम दिया। अधिकारियों ने शिकायतकर्ता को निर्देशों के अनुसार आरोपी से संपर्क करने को कहा और टीम आसपास मौजूद रही। जैसे ही कथित रिश्वत का लेन-देन हुआ, CBI अधिकारियों ने आरोपी को पकड़ लिया। एजेंसी के मुताबिक उसे रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।गिरफ्तारी के बाद एजेंसी यह भी जांच कर सकती है कि फायर NOC जारी करने की प्रक्रिया में किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका तो नहीं थी। हालांकि अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने आई जानकारी में किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का उल्लेख नहीं है। CBI ने कहा है कि मामले की जांच जारी है।कटरा जम्मू-कश्मीर का प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र है, जहां बड़ी संख्या में होटल, गेस्ट हाउस और अन्य आवासीय प्रतिष्ठान संचालित होते हैं। ऐसे प्रतिष्ठानों के लिए फायर सेफ्टी नियमों का पालन बेहद महत्वपूर्ण होता है। आग लगने जैसी आपात स्थितियों से बचाव के लिए अग्निशमन उपकरण, निकासी मार्ग और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच के बाद संबंधित विभाग NOC जारी करता है।
ऐसे मामलों में रिश्वत के आरोप प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा मानकों दोनों पर सवाल खड़े करते हैं। यदि किसी प्रतिष्ठान की NOC प्रक्रिया में भ्रष्टाचार होता है, तो इसका असर केवल कागजी मंजूरी तक सीमित नहीं रहता बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से भी जुड़ सकता है। इसी वजह से फायर सेफ्टी से संबंधित मंजूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन जरूरी माना जाता है।CBI की कार्रवाई के बाद विभागीय स्तर पर भी मामले की समीक्षा होने की संभावना है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि आरोपी के खिलाफ विभाग की ओर से अलग से कोई निलंबन या अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है या नहीं। इस संबंध में आगे आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।CBI ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल जांच जारी है। जांच के दौरान शिकायतकर्ता के बयान, रिश्वत की कथित मांग से जुड़े साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी। इसके बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।फिलहाल आरोपी फायरमैन की गिरफ्तारी के साथ मामला जांच के चरण में है। आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी। CBI की कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी सेवाओं से जुड़े रिश्वत मामलों पर एजेंसी की निगरानी को सामने रखा है।