जम्मू और कश्मीर

उमर अब्दुल्ला बोले चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन आगे भी चलेगा

Ratna Netam
6 Oct 2026 5:56 PM IST
उमर अब्दुल्ला बोले चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन आगे भी चलेगा
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को मतदाता सूची में बदलाव और नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ INDIA ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन ने इस मुद्दे पर आगे की कार्रवाई के लिए एक पूरा कैलेंडर तैयार किया है और चुनाव आयोग तक सांसदों का मार्च उसी कार्यक्रम की शुरुआत है।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में INDIA ब्लॉक की बैठक हुई थी, जिसमें चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाई गई। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ दिनों में हुई INDIA ब्लॉक की बैठक में एक कैलेंडर तैयार किया गया था। इसकी शुरुआत सांसदों के चुनाव आयोग तक मार्च से हुई और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।”
उनका बयान ऐसे समय आया है जब मंगलवार, 6 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसदों ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च किया। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। मार्च के दौरान कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।
INDIA ब्लॉक ने इससे पहले भी चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर देशव्यापी कार्यक्रम की घोषणा की थी। विपक्षी गठबंधन की योजना में 2 से 8 अक्टूबर के बीच विभिन्न राज्यों में “सेव डेमोक्रेसी” मार्च और 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक सांसदों का मार्च शामिल था। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव और नाम हटाए जाने के मामलों की स्वतंत्र और पारदर्शी तरीके से जांच होनी चाहिए।
उमर अब्दुल्ला ने विपक्ष के आंदोलन को उचित बताते हुए संकेत दिया कि यह केवल एक दिन का विरोध नहीं है। उनके मुताबिक INDIA ब्लॉक ने आने वाले दिनों के लिए भी कार्यक्रम निर्धारित किए हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता और चुनावी प्रक्रिया में लोगों का भरोसा लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
उमर अब्दुल्ला इससे पहले भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा चुके हैं। सितंबर के अंतिम सप्ताह में उन्होंने कहा था कि यदि लोगों का चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा खत्म हो जाता है तो लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद प्रभावित होती है। उस समय उन्होंने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से इस मामले में सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता बताई थी।
विवाद के केंद्र में मतदाता सूची का SIR है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और कई मामलों में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती गई। चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करता रहा है और उसका कहना है कि मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया नियमों के तहत की जा रही है। आयोग का तर्क है कि इसका उद्देश्य अपात्र, डुप्लीकेट या गलत प्रविष्टियों को हटाना और योग्य मतदाताओं को सूची में शामिल करना है।
हाल में चुनाव आयोग ने SIR के बाद मतदाता सूची से छूट गए पात्र नागरिकों को शामिल करने के लिए विशेष अभियान भी शुरू किया है। रिपोर्ट के अनुसार आयोग ने राज्यों को निर्देश दिया है कि ऐसे लोगों की पहचान की जाए जिनके नाम प्रक्रिया के दौरान छूट गए और उन्हें दोबारा पंजीकरण में सहायता दी जाए।
इस बीच, Form 6 में कथित बदलाव को लेकर भी विवाद सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से रिकॉर्ड मांगा है और स्पष्ट किया है कि उसने मतदाता पंजीकरण में इस्तेमाल होने वाले Form 6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी थी। अदालत यह देखेगी कि बदलाव किया गया था या नहीं और यदि किया गया तो किस स्तर पर निर्णय लिया गया।
इसी मुद्दे ने विपक्ष के विरोध को और तेज किया है। कांग्रेस समेत INDIA ब्लॉक के विभिन्न दलों का कहना है कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची से जुड़े सभी बदलावों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए और शिकायतों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। दूसरी ओर भाजपा ने विपक्ष के विरोध को राजनीतिक बताया है और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर अविश्वास पैदा करने का आरोप लगाया है।
मंगलवार को दिल्ली में हुए मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। पुलिस ने चुनाव आयोग कार्यालय की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की और कई नेताओं को हिरासत में लिया। विपक्षी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की, जबकि पुलिस का कहना था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई।
उमर अब्दुल्ला के बयान से स्पष्ट है कि चुनाव आयोग और SIR को लेकर विपक्ष का आंदोलन फिलहाल थमने वाला नहीं है। INDIA ब्लॉक इस मुद्दे को आगे भी राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर उठाने की तैयारी में है।फिलहाल मतदाता सूची, नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। विपक्ष पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बता रहा है। आने वाले दिनों में INDIA ब्लॉक के घोषित कार्यक्रमों के साथ यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक चर्चा में रह सकता है।
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