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कश्मीर में स्कूल टाइमिंग में फिलहाल बदलाव नहीं, शिक्षा निदेशक बोले- मौजूदा शेड्यूल रहेगा जारी

Kavita2
6 Oct 2026 5:37 PM IST
कश्मीर में स्कूल टाइमिंग में फिलहाल बदलाव नहीं, शिक्षा निदेशक बोले- मौजूदा शेड्यूल रहेगा जारी
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श्रीनगर। कश्मीर घाटी में सुबह के समय बढ़ती ठंड के बीच स्कूलों के समय में बदलाव की मांग तेज हो रही है। अभिभावकों का कहना है कि सुबह जल्दी बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो रहा है और ठंड के कारण छोटे विद्यार्थियों को परेशानी हो सकती है। हालांकि स्कूल शिक्षा निदेशक कश्मीर नसीर अहमद वानी ने साफ किया है कि फिलहाल स्कूलों की मौजूदा टाइमिंग बदलने की तत्काल कोई योजना नहीं है।

वानी ने कहा कि स्कूलों का वर्तमान समय एकेडमिक कैलेंडर और मौसमी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तय किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों और स्कूल स्टाफ को बदलते मौसम के अनुसार खुद को ढालना होगा।

शिक्षा निदेशक ने माना कि अभिभावकों की मांग गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर के दौरान सुबह के समय ठंड बढ़ती है और कई अभिभावक चाहते हैं कि स्कूल देर से शुरू हों। लेकिन विभाग पहले ही इस साल स्कूलों का समय सुबह 9 बजे कर चुका है।

वानी ने कहा कि पहले गर्मियों के दौरान मौसम के हिसाब से स्कूल टाइमिंग में कई बार बदलाव किए जाते थे, लेकिन अब विभाग चाहता है कि एकेडमिक कैलेंडर को अधिक स्थिर रखा जाए।

उन्होंने कहा, “यह सच है कि अभिभावकों की मांग है कि इस महीने समय में बदलाव आना चाहिए क्योंकि सुबह बहुत ठंड होती है। मांग ठीक है, लेकिन हमारा कैलेंडर इन चीजों के लिए तैयार रहना चाहिए।”

घाटी में अक्टूबर के साथ ही सुबह और शाम के तापमान में गिरावट शुरू हो जाती है। ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड का असर और ज्यादा महसूस होता है। ऐसे में स्कूल जाने वाले बच्चों, खासकर प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को सुबह जल्दी तैयार होकर निकलने में दिक्कत होती है।

अभिभावकों का कहना है कि सर्दी बढ़ने के साथ बच्चों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। कई बच्चे लंबी दूरी तय करके स्कूल पहुंचते हैं और उन्हें सुबह काफी पहले घर से निकलना पड़ता है।

इसी वजह से स्कूल समय को आगे बढ़ाने की मांग की जा रही है।

हालांकि शिक्षा विभाग का तर्क है कि स्कूल टाइमिंग में बार-बार बदलाव से शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। एक तय समय होने से छात्रों, शिक्षकों और परिवहन व्यवस्था को भी बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकता है।

वानी ने कहा कि मौजूदा समय मौसम और शैक्षणिक जरूरतों को संतुलित करके तय किया गया है। इसलिए फिलहाल इसमें बदलाव की जरूरत महसूस नहीं की जा रही है।

स्कूल शिक्षा विभाग इस बात पर भी जोर दे रहा है कि छात्र मौसम के अनुसार गर्म कपड़ों का इस्तेमाल करें और स्कूल प्रशासन भी बच्चों की सुविधा का ध्यान रखे।

घाटी में कई स्कूल ऐसे क्षेत्रों में स्थित हैं जहां सुबह का तापमान तेजी से गिरता है। इन इलाकों में बच्चों को स्कूल पहुंचने में ज्यादा समय लगता है।

स्कूल बस और अन्य परिवहन साधनों से आने वाले छात्रों को भी सुबह जल्दी निकलना पड़ता है। इस कारण अभिभावकों की मांग लगातार बढ़ रही है।

कुछ अभिभावकों का कहना है कि स्कूल यदि आधा घंटा या एक घंटा देर से शुरू हों तो बच्चों को काफी राहत मिल सकती है। खासकर छोटे बच्चों के लिए यह बदलाव ज्यादा मददगार हो सकता है।

लेकिन शिक्षा विभाग फिलहाल किसी व्यापक बदलाव के पक्ष में नहीं है।

विभाग का मानना है कि शैक्षणिक सत्र पहले से तय कैलेंडर के अनुसार चलना चाहिए और मौसम के हर छोटे बदलाव पर समय में फेरबदल नहीं किया जा सकता।

इस बीच स्कूल प्रबंधन को भी सलाह दी जा सकती है कि सुबह की गतिविधियों को बच्चों की सुविधा के हिसाब से व्यवस्थित करें।

जहां संभव हो, प्रार्थना सभा या खुले मैदान में होने वाली गतिविधियों को ठंड के दौरान सीमित किया जा सकता है।

इसके साथ ही कक्षाओं में बच्चों के बैठने की व्यवस्था और स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जा सकता है।

घाटी में सर्दी बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में यह मुद्दा और चर्चा में रह सकता है। यदि तापमान में तेज गिरावट होती है तो अभिभावक एक बार फिर स्कूल समय में बदलाव की मांग उठा सकते हैं।

शिक्षा विभाग भी मौसम की स्थिति पर नजर रखेगा और जरूरत पड़ने पर आगे कोई फैसला लिया जा सकता है।

फिलहाल विभाग का स्पष्ट रुख है कि तत्काल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

स्कूल शिक्षा निदेशक ने यह भी संकेत दिया कि किसी भी निर्णय में केवल मौसम ही नहीं बल्कि पूरे एकेडमिक कैलेंडर को ध्यान में रखा जाएगा।

बार-बार समय बदलने से शिक्षकों, छात्रों और स्कूल परिवहन व्यवस्था पर असर पड़ता है। इसलिए विभाग स्थिर व्यवस्था बनाए रखना चाहता है।

घाटी के कई हिस्सों में सुबह की ठंड और धुंध के कारण बच्चों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। अभिभावकों को भी बच्चों को मौसम के अनुसार गर्म कपड़े पहनाकर स्कूल भेजने की सलाह दी जा रही है।

शिक्षा विभाग का कहना है कि वर्तमान समय पहले ही सुबह 9 बजे किया जा चुका है, इसलिए अभी आगे बदलाव की जरूरत नहीं मानी जा रही है।

कुल मिलाकर कश्मीर में स्कूल टाइमिंग को लेकर अभिभावकों और शिक्षा विभाग के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं। अभिभावक बच्चों की सुविधा और स्वास्थ्य को लेकर समय बदलने की मांग कर रहे हैं, जबकि विभाग एकेडमिक कैलेंडर और स्थिर व्यवस्था को प्राथमिकता दे रहा है।

अब यह देखा जाएगा कि आने वाले दिनों में मौसम कितना बदलता है और बढ़ती ठंड के बीच विभाग अपने मौजूदा फैसले पर कायम रहता है या समय में संशोधन करता है।

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