अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा

Update: 2026-07-31 11:04 GMT

दिल्ली: एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले के बाद पांच साल पुराने इस चर्चित मामले में एक बड़ा कानूनी पड़ाव पूरा हो गया है। ताहिर हुसैन पर आरोप था कि दिल्ली हिंसा के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या की साजिश में उनकी भूमिका थी।

यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा से जुड़ा हुआ है। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा फैल गई थी। इस दौरान कई लोगों की जान गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। इसी हिंसा के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का मामला सामने आया था।

अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि अंकित शर्मा की हत्या भीड़ द्वारा की गई थी और इस पूरी घटना में ताहिर हुसैन की भूमिका अहम थी। जांच एजेंसियों ने दावा किया था कि हिंसा के दौरान ताहिर हुसैन के घर की छत से कथित रूप से पत्थरबाजी और हमले किए गए थे। वहीं, बचाव पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ताहिर हुसैन को मामले में फंसाया गया है।

कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ताहिर हुसैन को दोषी माना और अब उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत का यह फैसला दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस मामले में लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया चल रही थी और पीड़ित परिवार फैसले का इंतजार कर रहा था।

अंकित शर्मा की हत्या ने उस समय पूरे देश में काफी चर्चा बटोरी थी। अंकित शर्मा इंटेलिजेंस ब्यूरो में सुरक्षा सहायक के पद पर तैनात थे। दंगों के दौरान उनकी मौत के बाद परिवार ने न्याय की मांग की थी। जांच के दौरान पुलिस ने कई लोगों से पूछताछ की थी और मामले में आरोप पत्र दाखिल किया गया था।

दिल्ली दंगे फरवरी 2020 में हुए थे, जिनमें उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाके प्रभावित हुए थे। हिंसा के दौरान आगजनी, तोड़फोड़ और हत्या जैसी घटनाएं सामने आई थीं। इसके बाद पुलिस और जांच एजेंसियों ने कई मामलों में कार्रवाई शुरू की थी। कई आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग अदालतों में मुकदमे चल रहे हैं।

ताहिर हुसैन आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे थे और दिल्ली नगर निगम के पार्षद भी रह चुके थे। हिंसा के बाद उनका नाम कई मामलों में सामने आया था। हालांकि उन्होंने शुरुआत से ही अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया और खुद को निर्दोष बताया था।

अदालत के फैसले के बाद इस मामले में अब आगे की कानूनी प्रक्रिया का रास्ता खुला है। दोषी पक्ष के पास उच्च अदालत में फैसले को चुनौती देने का विकल्प उपलब्ध रहेगा। वहीं, पीड़ित परिवार और जांच एजेंसियों के लिए यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में एक अहम कदम माना जा रहा है।

अंकित शर्मा हत्याकांड दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित मामलों में से एक रहा है। अदालत के इस फैसले के बाद एक बार फिर 2020 की हिंसा और उससे जुड़े मामलों की चर्चा तेज हो गई है। कानून व्यवस्था और न्याय प्रक्रिया को लेकर भी इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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