एनसीआर नॉएडा न्यूज़: दिल्ली से सटे नोएडा में ट्विन टावर ध्वस्त होने के बाद उसके बगल वाली सोसायटी में रहने वाले 5 से 7 प्रतिशत लोगों में खुजली और एलर्जी की शिकायत सामने आ रही है। इसके अलावा जो पुराने अस्थमेटिक मरीज थे उन्हें भी दिक्कत हो रही है। उनका मानना है कि कुल 10 से 12 प्रतिशत लोगों के स्वास्थ्य पर ब्लास्ट का असर देखने को मिला है

बता दें ट्विन टावर के ध्वस्त होने से एक दिन पहले 27 अगस्त को एमराल्ड और एटीएस सोसायटी के करीब 50 लोगों की पीएफटी (पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट) की जांच और मेडिकल फार्म भरवाएं गए थे। ये उनके रूटीन हेल्थ के बारे में थे। ये जांच नोएडा के सीनियर कंसल्टेंट डाक्टर आशीष जैन ने मैक्स अस्पताल नोएडा और अपार्टमेंट आर्नर एसोसिएशन के साथ मिलकर किए थे। इसके नतीजे अब सामने आने लगे है। डाक्टर आशीष जैन ने बताया कि रूटीन मेडिकल फार्म में जो प्राइमरी जानकारी ली गई थी वे काफी बेहतर थी। ब्लास्ट के बाद जब लोग घर लौटे और उसके बाद जब दोबारा से रूटीन जांच की तो सोसायटी में 5 से 7 प्रतिशत लोगों में खुजली, एलर्जी की शिकायत मिली। इसके अलावा जो पुराने अस्थमेटिक मरीज थे उनमे थोड़ी दिक्कत जरूर देखने को मिली। उनका मानना है कि कुल 10 से 12 प्रतिशत लोगों के स्वास्थ्य पर ब्लास्ट का असर देखने को मिला।

सोसायटी की मांग मलबे को यहां से ले जाए दूर: एटीएस विजेल सोसायटी की निवासी पूनम मुटरेजा ने बताया कि ट्विन टावर के मलबे के छोटे-छोटे हिस्से होने से सेक्टर में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाएगा। इससे लोगों को अस्थमा संबंधित रोग बढ़ जाएंगे। सोसायटी के लोगों की मांग है कि मलबे के बड़े हिस्से को आबादी से दूर ले जाकर निस्तारण किया जाए। इससे सोसायटी के लोगों को प्रदूषण से बचाया जा सके। उन्होंने बताया कि मलवे का सेक्टर में ही छोटे-छोटे हिस्से करने से धूल तो उड़ेगी ही, इसके साथ ही ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ जाएगा।

इन सोसायटी वालों बढ़ी मलबे से परेशानी: सेक्टर-93ए में एमरॉल्ड कोर्ट, एटीएस विलेज ग्रींस, सिल्वर सिटी, पारसनाथ प्रेस्टीज, पारसनाथ सृष्टि, एल्डिको यूटोपिआ, एल्डिको ओलंपिया सोसायटी आती है। इन सभी सोसाइटी में तीन हजार से ज्यादा परिवार रह रहे हैं। इनकी संख्या 12 से 15 हजार है।

ट्विन टावर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया सीबीआरआई करेगा रिसर्च: ट्विन टावर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पर केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) की ओर से रिसर्च की जाएगी। देश में पहली बार 100 मीटर से ऊंचे टावर के ध्वस्तीकरण पर सीबीआरआई की तरफ से अधिक संख्या में डाटा एकत्र किया गया है। इसमें ग्राउंड वाइब्रेसन, बिल्डिंग में पहुंचने वाले वाइब्रेसन, एयर प्रेशर, एयर कंपन, बिल्डिंग गिरने वाली वेलोसिटी, रोटेसन, जमीन व हवा में कंपन की गति सहित अन्य पहलुओं पर जांच पड़ताल कर रिसर्च की जाएगी। सीबीआरआई के प्रमुख वैज्ञानिक व टीम लीडर डीपी कानूनगो ने बताया कि रिसर्च की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। पूरी प्रक्रिया में सात वैज्ञानिक मौजूद थे।

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