नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के दक्षिणी हिस्से से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। सरिता विहार इलाके में एक छह दिन के नवजात शिशु को सड़क किनारे लावारिस हालत में फेंक दिया गया। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां उसे इलाज के लिए एम्स में भर्ती कराया गया है।

घटना सरिता विहार इलाके की बताई जा रही है। राहगीरों ने सड़क किनारे एक नवजात बच्चे को पड़ा देखा। बच्चे की हालत देखकर लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने बिना देरी किए नवजात को अपने कब्जे में लिया और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, बच्चा करीब छह दिन का है और फिलहाल उसकी हालत डॉक्टरों की निगरानी में है। एम्स के चिकित्सकों की टीम बच्चे का इलाज कर रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नवजात को किसने और किन परिस्थितियों में सड़क पर छोड़ा।
सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि बच्चे को छोड़ने वाले व्यक्ति या लोगों की पहचान की जा सके। पुलिस आसपास के लोगों से भी पूछताछ कर रही है। जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि बच्चा किसका है और उसे सड़क पर छोड़ने के पीछे क्या वजह रही।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
नवजात को इस हालत में मिलने के बाद इलाके के लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि एक मासूम बच्चे को इस तरह सड़क पर छोड़ना बेहद अमानवीय कृत्य है। उन्होंने पुलिस से मामले में दोषी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि अगर समय रहते बच्चे पर किसी की नजर नहीं पड़ती तो उसकी जान को खतरा हो सकता था।
पुलिस ने की लोगों से अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी को बच्चे के माता-पिता या घटना से जुड़ी कोई जानकारी मिलती है तो वह तुरंत पुलिस को सूचित करें। अधिकारियों का कहना है कि बच्चे की सुरक्षा और आरोपी की पहचान दोनों को प्राथमिकता दी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार आर्थिक, सामाजिक या पारिवारिक कारणों से नवजात बच्चों को छोड़ने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे मामलों में लोगों को कानूनी और सामाजिक सहायता लेनी चाहिए, ताकि किसी मासूम की जिंदगी खतरे में न पड़े। फिलहाल नवजात एम्स में डॉक्टरों की निगरानी में है और पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। अब सबसे बड़ी चुनौती बच्चे के परिजनों तक पहुंचना और उसे सुरक्षित भविष्य उपलब्ध कराना है।
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