कमजोर मानसून ने बढ़ाई पेट्रोल-डीजल की मांग, बिक्री में उछाल

Update: 2026-07-16 14:44 GMT

BUSINESS: देश में कमजोर मानसून और बारिश में देरी का असर अब ईंधन की खपत पर भी दिखाई देने लगा है। आमतौर पर मानसून के मौसम में पेट्रोल और डीजल की मांग में कमी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार स्थिति अलग रही। जुलाई के पहले पखवाड़े में पेट्रोल और डीजल की बिक्री में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। किसानों की बढ़ी जरूरतों और वाहन संचालन में वृद्धि के कारण ईंधन की मांग में तेजी आई है।

सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख पेट्रोलियम कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) के आंकड़ों के अनुसार, 1 से 15 जुलाई के बीच पेट्रोल की बिक्री में सालाना आधार पर 22.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस अवधि में पेट्रोल की बिक्री बढ़कर करीब 16.3 लाख टन हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 13.3 लाख टन था।

वहीं, डीजल की बिक्री में भी बड़ा उछाल देखने को मिला। जुलाई के पहले पखवाड़े में डीजल की बिक्री सालाना आधार पर 20.9 प्रतिशत बढ़कर 34.6 लाख टन तक पहुंच गई। पिछले साल इसी अवधि में डीजल की बिक्री करीब 28.7 लाख टन रही थी। आंकड़ों से साफ है कि इस बार मानसून की देरी ने ईंधन की मांग के सामान्य ट्रेंड को बदल दिया है।

आमतौर पर बारिश शुरू होने के बाद डीजल की मांग में कमी आ जाती है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह होती है कि किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए डीजल पंपों का कम इस्तेमाल करना पड़ता है। इसके अलावा बारिश के दौरान सड़क यातायात में भी कुछ कमी देखने को मिलती है। लेकिन इस साल कई इलाकों में मानसून कमजोर रहने और बारिश में देरी के कारण किसानों को सिंचाई के लिए ज्यादा समय तक डीजल चालित पंपों पर निर्भर रहना पड़ा।

कृषि क्षेत्र में डीजल की बढ़ी खपत इस उछाल की बड़ी वजह मानी जा रही है। खरीफ फसलों की बुवाई के समय पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसानों को खेतों में पानी पहुंचाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़े। इससे ट्रैक्टर, सिंचाई पंप और कृषि उपकरणों के इस्तेमाल में वृद्धि हुई, जिसका सीधा असर डीजल की मांग पर पड़ा।

इसके अलावा पेट्रोल की बिक्री बढ़ने के पीछे कई अन्य कारण भी बताए जा रहे हैं। गर्मी और बारिश में देरी के दौरान निजी वाहनों का इस्तेमाल बढ़ा रहा। कई लोग मौसम की अनिश्चितता के कारण सार्वजनिक परिवहन के बजाय अपने वाहनों से यात्रा करना पसंद कर रहे हैं। इससे पेट्रोल की खपत में भी तेजी आई।

विशेषज्ञों के अनुसार, ईंधन की मांग में यह बढ़ोतरी अस्थायी भी हो सकती है। अगर आने वाले दिनों में मानसून सामान्य होता है और अच्छी बारिश होती है, तो कृषि क्षेत्र में डीजल की मांग कम हो सकती है। वहीं, अगर बारिश की स्थिति कमजोर बनी रहती है तो सिंचाई और कृषि गतिविधियों के लिए ईंधन की जरूरत आगे भी बनी रह सकती है।

भारत में ईंधन की मांग का सीधा संबंध कृषि, परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। इसलिए मानसून की स्थिति देश की ऊर्जा खपत को प्रभावित करती है। इस बार कमजोर मानसून ने जहां किसानों की मुश्किलें बढ़ाईं, वहीं इसका असर पेट्रोलियम बाजार में बढ़ी मांग के रूप में सामने आया है।

जुलाई के शुरुआती 15 दिनों के आंकड़े बताते हैं कि मौसम की स्थिति किस तरह देश की ईंधन खपत को प्रभावित कर सकती है। आने वाले महीनों में मानसून का प्रदर्शन और कृषि गतिविधियों की रफ्तार तय करेगी कि पेट्रोल और डीजल की मांग किस दिशा में जाती है। फिलहाल कमजोर बारिश के कारण ईंधन बाजार में मांग का नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है।

Tags:    

Similar News