एथनॉल विवाद पर सरकार की दो टूक, विमान ईंधन में बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं
नई दिल्ली : विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) में एथनॉल मिलाने को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए ऐसे सभी दावों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है। सरकार ने कहा है कि ATF में एथनॉल मिलाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है और इस तरह की खबरें केवल अफवाह हैं। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि केंद्र सरकार विमान ईंधन में भी एथनॉल मिलाने की तैयारी कर रही है। इस दावे के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और विमान यात्रियों के बीच भी कई तरह की आशंकाएं सामने आने लगीं।
इस पूरे मामले पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने विस्तृत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार की ओर से ATF में एथनॉल मिलाने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस तरह के दावे पूरी तरह गलत, भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एथनॉल और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) दो अलग-अलग चीजें हैं और दोनों को एक-दूसरे के साथ जोड़कर देखना गलत है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विमान ईंधन है, जिसे इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) सहित वैश्विक विमानन संस्थाओं की स्वीकृति प्राप्त है। उन्होंने कहा कि SAF को इस्तेमाल में लाने से पहले कई स्तरों पर कठोर परीक्षण किए जाते हैं और यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों पर पूरी तरह खरा उतरता है। इसके विपरीत एथनॉल मिश्रण की चर्चा का SAF से कोई संबंध नहीं है।
राम मोहन नायडू ने यह भी कहा कि हवाई सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर बिना तथ्यों के गलत जानकारी फैलाना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। इससे यात्रियों के मन में अनावश्यक डर और भ्रम पैदा होता है। उन्होंने दोहराया कि विमान यात्रियों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।
दरअसल, अरविंद केजरीवाल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया था कि उन्हें सूत्रों से जानकारी मिली है कि केंद्र सरकार ATF में एथनॉल मिलाने की योजना बना रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा होने पर उड़ानों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भविष्य में पेट्रोल में एथनॉल की मात्रा बढ़ाकर 50 प्रतिशत से अधिक करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि आगे चलकर डीजल में भी एथनॉल मिलाया जा सकता है।
केजरीवाल ने अपनी पोस्ट में ई20 पेट्रोल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले ई20 व्यवस्था लागू कर दी गई और अब भविष्य में ई50 जैसे मिश्रण लागू किए जा सकते हैं, जिससे वर्तमान वाहनों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने लोगों से फिलहाल नए पेट्रोल और डीजल वाहन खरीदने में सावधानी बरतने की अपील भी की। इससे पहले भी उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ई20 ईंधन को लेकर चिंता जताई थी और पेट्रोल पंपों पर सामान्य पेट्रोल तथा ई20 दोनों विकल्प उपलब्ध कराने की मांग की थी।
हालांकि सरकार ने इन सभी दावों को खारिज करते हुए कहा है कि विमान ईंधन को लेकर ऐसी कोई योजना नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया कि एथनॉल मिश्रित ईंधन और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल को लेकर भ्रम फैलाना उचित नहीं है क्योंकि दोनों की तकनीक, उपयोग और मानक पूरी तरह अलग हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कहना है कि विमानन क्षेत्र में किसी भी प्रकार का ईंधन तभी उपयोग में लाया जाता है जब वह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों पर पूरी तरह खरा उतरता हो।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि विमानन क्षेत्र में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है और किसी भी नए ईंधन को अपनाने से पहले वर्षों तक परीक्षण, प्रमाणन और तकनीकी मूल्यांकन किया जाता है। ऐसे में सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रही अपुष्ट जानकारियों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी सूचनाओं को ही सही मानें।