RBI के पॉलिमर नोटों पर सरकार का बड़ा खुलासा, पुराने 10 और 20 रुपये के नोट रहेंगे या नहीं?
नई दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 10 और 20 रुपये के पॉलिमर (प्लास्टिक) नोटों के फील्ड ट्रायल की तैयारी के बाद देशभर में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या जल्द ही मौजूदा कागज के नोट बंद होने वाले हैं। सोशल मीडिया पर भी इस विषय को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने इन सभी आशंकाओं पर विराम लगाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल कागज के नोटों को बंद करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार ने कहा है कि पॉलिमर नोटों का ट्रायल केवल परीक्षण के उद्देश्य से किया जाएगा और मौजूदा 10 व 20 रुपये के कागज के नोट पहले की तरह पूरी तरह वैध रहेंगे।
सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत 10 और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों का सीमित स्तर पर फील्ड ट्रायल किया जाएगा। इस ट्रायल के दौरान दोनों मूल्यवर्ग के लगभग एक-एक अरब नोट जारी किए जाएंगे। इन नोटों का उद्देश्य यह परखना होगा कि भारतीय मौसम, जलवायु और आम उपयोग की परिस्थितियों में पॉलिमर नोट कितने प्रभावी और टिकाऊ साबित होते हैं। ट्रायल के नतीजों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि फिलहाल पॉलिमर सब्सट्रेट की खरीद प्रक्रिया जारी है। इसके बाद नोटों की छपाई, सुरक्षा मानकों की जांच, गुणवत्ता परीक्षण और अन्य तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। सभी आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद ही इन नोटों को आम लोगों के बीच परीक्षण के लिए जारी किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से होगी और किसी भी बड़े फैसले से पहले सभी पहलुओं का गहन मूल्यांकन किया जाएगा।
पॉलिमर नोट सामान्य कागज के बजाय विशेष प्रकार की मजबूत प्लास्टिक फिल्म से बनाए जाते हैं। इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये पानी, नमी, धूल और गंदगी से आसानी से खराब नहीं होते। साथ ही ये बार-बार मोड़ने या लंबे समय तक इस्तेमाल के बावजूद जल्दी फटते नहीं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पॉलिमर नोटों की उम्र सामान्य कागज के नोटों की तुलना में ढाई से चार गुना अधिक होती है। इससे नोटों की बार-बार छपाई की आवश्यकता कम होती है और लंबे समय में सरकार के लिए भी लागत घट सकती है।
इन नोटों में आधुनिक सुरक्षा फीचर्स भी लगाए जाते हैं, जिनकी नकल करना बेहद कठिन माना जाता है। पारदर्शी विंडो, विशेष सुरक्षा परत, उन्नत प्रिंटिंग तकनीक और अन्य सुरक्षा तत्व नकली नोटों पर प्रभावी नियंत्रण में मदद कर सकते हैं। यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और कई अन्य देशों में पॉलिमर नोटों का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है।
हालांकि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि पॉलिमर नोटों के आने का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा कागज के नोट अमान्य हो जाएंगे। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि यदि ट्रायल सफल भी रहता है, तब भी पॉलिमर नोट और कागज के नोट समानांतर रूप से प्रचलन में रहेंगे। यानी लोगों को अपने पास मौजूद 10 और 20 रुपये के नोट बदलवाने की कोई जरूरत नहीं होगी और वे पहले की तरह बाजार में वैध मुद्रा बने रहेंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पॉलिमर नोटों के आने से डिजिटल भुगतान पर कोई प्रभाव पड़ेगा। भारतीय रिजर्व बैंक का मानना है कि नकद लेनदेन और डिजिटल पेमेंट दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों का उपयोग भविष्य में भी समान रूप से जारी रहेगा। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ-साथ नकदी की उपलब्धता भी अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक बनी रहेगी।
सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद आम लोगों की चिंताएं काफी हद तक दूर हो गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भविष्य में पॉलिमर नोटों का व्यापक इस्तेमाल शुरू भी होता है, तो यह प्रक्रिया धीरे-धीरे लागू की जाएगी। फिलहाल लोगों को अपने पुराने 10 और 20 रुपये के नोट बदलने की आवश्यकता नहीं है। वे पहले की तरह पूरी तरह मान्य हैं और बिना किसी परेशानी के उनका उपयोग किया जा सकता है। आने वाले समय में ट्रायल के परिणामों के आधार पर आरबीआई और केंद्र सरकार आगे का फैसला लेंगी, लेकिन अभी आम नागरिकों को किसी प्रकार की चिंता करने की जरूरत नहीं है।