नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया यानी **NSE के बहुप्रतीक्षित IPO** को लेकर ग्रे मार्केट में उत्साह कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। शनिवार, 19 सितंबर को कुछ GMP ट्रैकर्स पर NSE IPO का ग्रे मार्केट प्रीमियम 100 रुपये के नीचे आ गया। दोपहर करीब 2 बजे एक ट्रैकर पर GMP करीब **84 रुपये** दर्ज किया गया, जबकि सुबह एक अन्य ट्रैकर ने इसे 99 रुपये बताया था। हालांकि अलग-अलग अनौपचारिक प्लेटफॉर्म पर GMP के आंकड़े अलग हैं और कुछ ट्रैकर्स पर यह 110 रुपये से ऊपर भी दर्ज हुआ।GMP में आई इस गिरावट ने उन निवेशकों का ध्यान खींचा है, जो NSE के शेयरों की मजबूत लिस्टिंग की उम्मीद लगाए बैठे हैं। कुछ दिन पहले तक NSE IPO का GMP 200 रुपये से काफी ऊपर चल रहा था। अब इसके तेजी से नीचे आने से अनुमानित लिस्टिंग प्रीमियम भी घट गया है।हालांकि GMP एक **अनौपचारिक और अनियमित बाजार संकेतक** है। इससे वास्तविक लिस्टिंग मूल्य की गारंटी नहीं मिलती। शेयर किस भाव पर सूचीबद्ध होगा, यह उस दिन बाजार की परिस्थितियों, निवेशकों की मांग और दूसरे कारकों पर निर्भर करेगा।
84 रुपये तक पहुंचा GMP
19 सितंबर की दोपहर उपलब्ध एक रिपोर्ट के अनुसार NSE IPO का GMP करीब 84 रुपये तक गिर गया। ऊपरी प्राइस बैंड 1,785 रुपये के आधार पर यह करीब **1,869 रुपये के अनुमानित लिस्टिंग मूल्य** की ओर संकेत करता है। इस हिसाब से संभावित प्रीमियम करीब 4.7 प्रतिशत बैठता है।लेकिन यह आंकड़ा स्थिर नहीं है। InvestorGain ने 19 सितंबर की सुबह NSE IPO का GMP 99 रुपये दर्ज किया था। इसके आधार पर अनुमानित लिस्टिंग मूल्य करीब 1,884 रुपये और संभावित प्रीमियम करीब 5.55 प्रतिशत था।वहीं दूसरे GMP ट्रैकर्स पर उसी दिन आंकड़ा 110-115 रुपये या इससे अधिक भी दर्ज हुआ। इसलिए किसी एक GMP संख्या को अंतिम मानना सही नहीं होगा। ग्रे मार्केट के भाव अलग-अलग स्रोतों और समय के हिसाब से बदल सकते हैं।
300 रुपये के आसपास पहुंच चुका था प्रीमियम
NSE IPO के GMP की पिछली चाल देखें तो गिरावट काफी बड़ी दिखाई देती है। InvestorGain के अनुसार पिछले 16 सत्रों में GMP का उच्च स्तर करीब **310 रुपये** तक रहा था। 19 सितंबर की सुबह यही आंकड़ा घटकर 99 रुपये रह गया।एक अन्य ट्रैकर के मुताबिक 7 सितंबर को GMP 282 रुपये, 9 सितंबर को 250 रुपये, 12 सितंबर को 218 रुपये, 15 सितंबर को 208 रुपये और 16 सितंबर को 160 रुपये था। 17 सितंबर को यह 150 रुपये और 18 सितंबर को 141 रुपये पर आ गया। यानी IPO खुलने के आसपास ग्रे मार्केट प्रीमियम में लगातार कमजोरी देखने को मिली।19 सितंबर को कुछ ट्रैकर्स पर भाव और नीचे चले गए। इस लिहाज से शुरुआती ऊंचे GMP की तुलना में अब ग्रे मार्केट में NSE के शेयरों को लेकर प्रीमियम काफी कम हो चुका है।
क्या कमजोर होगी NSE की लिस्टिंग
GMP में गिरावट को देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या NSE के शेयरों की लिस्टिंग भी उम्मीद से कमजोर रह सकती है। इसका सीधा जवाब अभी देना संभव नहीं है।मौजूदा GMP केवल इतना संकेत देता है कि अनौपचारिक ग्रे मार्केट में शुरुआती दिनों की तुलना में प्रीमियम की उम्मीद घटी है। यह लिस्टिंग के दिन शेयर की वास्तविक कीमत की भविष्यवाणी नहीं करता।उदाहरण के तौर पर अगर GMP 84 रुपये मान लिया जाए तो ऊपरी इश्यू प्राइस 1,785 रुपये पर अनुमानित भाव 1,869 रुपये बनता है। यानी यह अभी भी इश्यू प्राइस से ऊपर है, लेकिन कुछ दिन पहले दिख रहे दोहरे अंक के संभावित प्रतिशत प्रीमियम की तुलना में काफी कम है।इसलिए मौजूदा आंकड़ों को 'लिस्टिंग पर झटका तय' के रूप में पढ़ना उचित नहीं होगा। इसे ग्रे मार्केट सेंटीमेंट में आई कमजोरी के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है।
1,700 से 1,785 रुपये है प्राइस बैंड
NSE ने अपने IPO के लिए **1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर** का प्राइस बैंड तय किया है। यह इश्यू 17 सितंबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुला और 21 सितंबर तक बोली लगाई जा सकती है। शेयरों की प्रस्तावित लिस्टिंग 24 सितंबर को है।करीब **22,569 करोड़ रुपये** का यह सार्वजनिक निर्गम देश के बड़े IPO में शामिल है। इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी OFS है।इसके तहत मौजूदा शेयरधारक करीब 12.64 करोड़ शेयर बेच रहे हैं। चूंकि IPO में कोई फ्रेश इश्यू कंपोनेंट नहीं है, इसलिए शेयर बिक्री से मिलने वाली रकम सीधे NSE के पास नहीं जाएगी।
एंकर निवेशकों से जुटाए 6,746 करोड़
IPO खुलने से पहले NSE ने एंकर निवेशकों से करीब **6,746.18 करोड़ रुपये** जुटाए थे। कंपनी ने 16 सितंबर को करीब 3.78 करोड़ शेयर एंकर निवेशकों को 1,785 रुपये प्रति शेयर के भाव पर आवंटित किए।एंकर बुक में LIC, Fidelity और Abu Dhabi Investment Authority जैसे बड़े निवेशकों की भागीदारी की रिपोर्ट सामने आई थी।इसके बावजूद ग्रे मार्केट प्रीमियम में गिरावट यह दिखाती है कि एंकर निवेशकों की मांग और अनौपचारिक ग्रे मार्केट की धारणा को एक ही चीज नहीं माना जा सकता।
दूसरे दिन ही पूरा सब्सक्राइब हुआ IPO
GMP में कमजोरी के बावजूद NSE IPO को सब्सक्रिप्शन के मोर्चे पर मांग मिली है। 18 सितंबर यानी बोली के दूसरे दिन यह इश्यू पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था।उपलब्ध एक्सचेंज आंकड़ों के मुताबिक दूसरे दिन तक करीब 8.86 करोड़ शेयरों के मुकाबले 10.28 करोड़ से अधिक शेयरों के लिए बोलियां मिली थीं। इस तरह कुल सब्सक्रिप्शन करीब **1.16 गुना** पहुंच गया था।श्रेणीवार देखें तो उस समय रिटेल निवेशकों का हिस्सा करीब 0.72 गुना, गैर-संस्थागत निवेशकों यानी NII का हिस्सा 1.68 गुना और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी QIB का हिस्सा 1.53 गुना सब्सक्राइब हुआ था। कर्मचारी श्रेणी भी करीब 1.53 गुना भरी थी।पहले दिन IPO करीब 43 प्रतिशत सब्सक्राइब हुआ था। दूसरे दिन मांग बढ़ने के बाद इश्यू पूरी तरह भर गया।
फिर क्यों गिर रहा GMP?
ग्रे मार्केट प्रीमियम में बदलाव के पीछे कोई एक आधिकारिक कारण नहीं होता। यह अनौपचारिक बाजार में खरीदारों और विक्रेताओं की मांग, IPO की कीमत को लेकर धारणा, शेयर बाजार के माहौल और लिस्टिंग गेन की उम्मीद जैसे कई कारकों से प्रभावित हो सकता है।NSE IPO के मामले में खास बात यह है कि एक तरफ सब्सक्रिप्शन बढ़ रहा है, जबकि दूसरी तरफ GMP शुरुआती ऊंचे स्तर से नीचे आया है।इससे यह समझना जरूरी है कि सब्सक्रिप्शन और GMP अलग-अलग संकेतक हैं। किसी IPO का ज्यादा सब्सक्राइब होना अपने आप मजबूत लिस्टिंग की गारंटी नहीं देता। उसी तरह GMP का गिरना भी यह साबित नहीं करता कि शेयर डिस्काउंट पर ही खुलेगा।
NSE की कमाई में गिरावट भी चर्चा में
निवेशक NSE के वित्तीय प्रदर्शन को भी देख रहे हैं। FY26 में कंपनी ने परिचालन से करीब **16,601.31 करोड़ रुपये** का राजस्व दर्ज किया, जो FY25 के करीब 17,140.67 करोड़ रुपये से 3 प्रतिशत से अधिक कम था।ट्रांजैक्शन चार्ज से होने वाली आय करीब 13,057 करोड़ रुपये रही, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में यह करीब 13,636 करोड़ रुपये थी।ब्रोकरेज विश्लेषण में ट्रेडिंग वॉल्यूम, नियामकीय बदलाव, साइबर सुरक्षा, काउंटरपार्टी और सिस्टम से जुड़े जोखिमों का भी उल्लेख किया गया है। ट्रांजैक्शन चार्ज कंपनी की आय का बड़ा हिस्सा है, इसलिए ट्रेडिंग गतिविधियों में लंबे समय तक कमी रहने का असर कमाई पर पड़ सकता है।
GMP को क्यों नहीं मानना चाहिए गारंटी?
ग्रे मार्केट शेयर बाजार का आधिकारिक हिस्सा नहीं है। यहां होने वाली गतिविधियों को स्टॉक एक्सचेंज पर होने वाले नियमित कारोबार की तरह आधिकारिक मूल्य खोज प्रक्रिया नहीं माना जाता।GMP केवल यह बताता है कि अनौपचारिक बाजार में किसी IPO के शेयर को लेकर उस समय किस तरह का प्रीमियम बताया जा रहा है। यह कुछ घंटों में भी बदल सकता है।यही NSE IPO में देखने को मिल रहा है। अलग-अलग ट्रैकर्स पर 19 सितंबर को 84 रुपये, 99 रुपये और 110 रुपये से अधिक के GMP आंकड़े सामने आए। इसलिए 'आज का GMP' बताते समय स्रोत और अपडेट का समय महत्वपूर्ण है।
24 सितंबर को प्रस्तावित है लिस्टिंग
NSE IPO की बोली प्रक्रिया 21 सितंबर को बंद होनी है और शेयरों की लिस्टिंग 24 सितंबर को प्रस्तावित है।ऐसे में लिस्टिंग से पहले GMP में और बदलाव संभव है। निवेशकों की नजर अंतिम सब्सक्रिप्शन आंकड़ों, खासकर संस्थागत निवेशकों की मांग, व्यापक शेयर बाजार के रुझान और लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट की चाल पर रहेगी।फिलहाल इतना स्पष्ट है कि NSE IPO का GMP अपने शुरुआती ऊंचे स्तर से काफी नीचे आ चुका है। 19 सितंबर को कुछ ट्रैकर्स पर यह 100 रुपये से नीचे पहुंच गया, लेकिन यह अभी भी ऊपरी इश्यू प्राइस के मुकाबले सकारात्मक प्रीमियम की ओर संकेत कर रहा था। वास्तविक लिस्टिंग प्राइस 24 सितंबर को बाजार में शेयरों की मांग और परिस्थितियों से तय होगा, इसलिए GMP के आधार पर निश्चित लिस्टिंग गेन या नुकसान मान लेना उचित नहीं है।