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गोबर बनेगा कमाई का जरिया, केंद्र सरकार लाई नई 'गोबरधन' योजना

Ratna Netam
6 Aug 2026 6:45 PM IST
गोबर बनेगा कमाई का जरिया, केंद्र सरकार लाई नई गोबरधन योजना
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नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने देश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने और जैविक कचरे के बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से एक बड़ी पहल करते हुए **'गोबरधन' (GOBARdhan)** योजना को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस महत्वाकांक्षी योजना को हरी झंडी दी गई। करीब **23,731 करोड़ रुपये** की लागत वाली यह योजना वर्ष **2026-27 से 2035-36** तक लागू रहेगी। इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने असम में **राष्ट्रीय राजमार्ग-15** के गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर के विकास के लिए **8,970.20 करोड़ रुपये** की परियोजना को भी मंजूरी दी है।
कैबिनेट बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि गोबरधन योजना का उद्देश्य देश में कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) उत्पादन को बढ़ावा देना, जैविक कचरे का वैज्ञानिक उपयोग सुनिश्चित करना और किसानों को अतिरिक्त आय का नया स्रोत उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि इस योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
योजना के तहत पशुओं के गोबर, फसल अवशेष, गन्ने की खोई, नगर निकायों से निकलने वाले जैविक कचरे और अन्य बायोमास का उपयोग कर बायोगैस तथा जैविक खाद तैयार की जाएगी। इससे एक ओर जहां खेतों में पराली जलाने जैसी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर स्वच्छ ईंधन के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का कहना है कि यह पहल कचरे को संसाधन में बदलने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।
गोबरधन योजना के माध्यम से किसानों को अपने कृषि अवशेष और गोबर बेचकर अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिलेगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में बायोगैस संयंत्रों की स्थापना से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करना है।
केंद्र सरकार ने बताया कि इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए कई प्रोत्साहन उपाय किए जाएंगे। इनमें कम्प्रेस्ड बायोगैस की सुनिश्चित मांग, आकर्षक और स्थिर मूल्य निर्धारण, पूंजीगत सहायता, गैस पाइपलाइन अवसंरचना का विस्तार, आसान ऋण सुविधा तथा नई तकनीकों के विकास को बढ़ावा देना शामिल है। सरकार का मानना है कि इन कदमों से देशभर में बायोगैस उद्योग का तेजी से विस्तार होगा और निजी निवेश भी बढ़ेगा।
कैबिनेट ने ऊर्जा क्षेत्र के अलावा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया। मंत्रिमंडल ने असम में राष्ट्रीय राजमार्ग-15 पर **135.871 किलोमीटर लंबे गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर** के विकास को मंजूरी दी है। लगभग **8,970.20 करोड़ रुपये** की लागत वाली इस परियोजना का निर्माण **निर्माण-संचालन-हस्तांतरण (BOT) टोल मॉडल** पर किया जाएगा।
इस हाईवे परियोजना के तहत पांच प्रमुख बाइपास का निर्माण किया जाएगा, जिससे बाइहाटा चारियाली, सिपाझार, खरुपेटिया, देकियाजुली और तेजपुर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी। परियोजना में **15 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 19 फ्लाईओवर, 46 अंडरपास** और तेजपुर बाइपास में **एक हाथी अंडरपास** का निर्माण भी प्रस्तावित है। वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हाथी अंडरपास को विशेष रूप से शामिल किया गया है।
परियोजना की एक खास विशेषता तेजपुर बाइपास में बनने वाली **4.9 किलोमीटर लंबी आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (Emergency Landing Facility)** है, जिसे भारतीय वायुसेना के समन्वय से विकसित किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर इस हिस्से का उपयोग सैन्य विमानों की आपात लैंडिंग के लिए किया जा सकेगा, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
सरकार के अनुसार इस नए कॉरिडोर के निर्माण से यात्रा की औसत गति लगभग दोगुनी हो जाएगी और सफर में लगने वाला समय लगभग आधा रह जाएगा। इससे ईंधन की बचत होगी, वाहन परिचालन लागत कम होगी और सड़क सुरक्षा में भी सुधार आएगा। साथ ही यह परियोजना असम और अरुणाचल प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक केंद्रों के बीच संपर्क को बेहतर बनाएगी, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार के इन दोनों फैसलों को स्वच्छ ऊर्जा, ग्रामीण विकास और आधुनिक बुनियादी ढांचे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एक ओर गोबरधन योजना किसानों की आय बढ़ाने और जैविक कचरे के वैज्ञानिक उपयोग को प्रोत्साहित करेगी, वहीं दूसरी ओर गुवाहाटी-तेजपुर हाईवे परियोजना पूर्वोत्तर भारत में बेहतर कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नई मजबूती प्रदान करेगी।
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