नई दिल्ली। वेदांता ग्रुप की कंपनी वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड और सरकार के बीच एक नया विवाद सामने आया है। भारत सरकार के तहत काम करने वाले डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हाइड्रोकार्बन्स (DGH) ने कंपनी से करीब 35 मिलियन डॉलर यानी 510 करोड़ रुपये से अधिक के हर्जाने की मांग की है। यह मामला ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (OALP) के तहत मिले चार ऑयल और गैस ब्लॉक से जुड़ा हुआ है।
कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बताया है कि DGH ने चार ब्लॉक्स की समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही इन ब्लॉक्स से जुड़े अनुबंध उल्लंघन के लिए लिक्विडेटेड डैमेज यानी तय हर्जाना और उस पर लागू ब्याज का भुगतान करने के लिए डिमांड लेटर जारी किया गया है।
OALP के तहत मिले थे चार ब्लॉक
पूरा विवाद वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड को ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी के तहत आवंटित किए गए चार ऑयल और गैस ब्लॉक्स को लेकर है। OALP भारत सरकार की एक नीति है, जिसके तहत कंपनियों को तेल और गैस की खोज एवं उत्पादन के लिए क्षेत्र आवंटित किए जाते हैं।
कंपनी का कहना है कि इन ब्लॉक्स से जुड़े कामों के लिए समय सीमा बढ़ाने की मांग की गई थी, लेकिन DGH ने इसे मंजूरी नहीं दी। इसके बाद सरकार की ओर से कंपनी पर हर्जाना लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
DGH ने मांगा लिक्विडेटेड डैमेज
DGH की ओर से जारी नोटिस में कंपनी से लिक्विडेटेड डैमेज और ब्याज की मांग की गई है। लिक्विडेटेड डैमेज वह राशि होती है, जो किसी अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं होने पर पहले से तय होती है। इसमें देरी या तय समय में काम पूरा नहीं करने जैसी परिस्थितियां शामिल हो सकती हैं।
हालांकि, वेदांता ऑयल एंड गैस का कहना है कि इस मामले में उसका पक्ष मजबूत है और वह कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। कंपनी ने कहा कि वह इस विवाद को सुलह या मध्यस्थता के जरिए सुलझाने की कोशिश कर रही है।
कंपनी ने मांगी विशेषज्ञ समिति की मदद
वेदांता ऑयल एंड गैस ने DGH से अनुरोध किया है कि इस मामले को एक बाहरी प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की समिति (CEEE) के पास भेजा जाए। कंपनी का मानना है कि विशेषज्ञों की मदद से इस विवाद का निष्पक्ष समाधान निकाला जा सकता है।
कंपनी ने कहा कि वह इस मामले में अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी। फिलहाल कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस विवाद का वित्तीय प्रभाव अभी पूरी तरह तय नहीं किया गया है। इसका आकलन कानूनी प्रक्रिया के परिणाम और लागू अकाउंटिंग नियमों के आधार पर किया जाएगा।
वेदांता पर बढ़ा दबाव
इस विवाद का असर कंपनी के शेयर प्रदर्शन पर भी देखने को मिला है। खबर सामने आने के बाद वेदांता ऑयल एंड गैस से जुड़ी चिंताओं के कारण बाजार में दबाव देखा गया। निवेशक अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और संभावित वित्तीय असर पर नजर बनाए हुए हैं।
वेदांता ग्रुप भारत की प्रमुख खनन, धातु और ऊर्जा कंपनियों में शामिल है। कंपनी तेल और गैस क्षेत्र में भी लंबे समय से सक्रिय है। ऐसे में सरकार और कंपनी के बीच यह विवाद ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े निवेश और नीतिगत फैसलों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि DGH और वेदांता के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या फिर मामला कानूनी प्रक्रिया की ओर बढ़ता है। कंपनी की ओर से मध्यस्थता और विशेषज्ञ समिति के विकल्प का सुझाव दिया गया है, जबकि सरकार की ओर से हर्जाने की मांग जारी है। आने वाले समय में इस विवाद का अंतिम परिणाम ही तय करेगा कि कंपनी को कितनी वित्तीय जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी।