Business व्यापर : भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत कमजोर रही। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए गए नए प्रतिबंधों के असर से निवेशकों में सतर्कता देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों शुरुआती कारोबार में दबाव में नजर आए और बाजार सीमित दायरे में कारोबार करता रहा।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा समय में निवेशक वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसके अलावा मासिक वायदा और विकल्प (F&O) समाप्ति के कारण भी बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना बनी हुई है।

ईरान पर प्रतिबंधों का बाजार पर असर

अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में डर का माहौल इसलिए भी बना हुआ है क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई और कंपनियों की लागत दोनों को प्रभावित कर सकता है।

निवेशक इस बात का आकलन कर रहे हैं कि अमेरिका-ईरान तनाव आगे किस दिशा में जाता है। अगर तनाव बढ़ता है तो वैश्विक बाजारों में दबाव बढ़ सकता है, जबकि स्थिति सामान्य होने पर बाजार में फिर से तेजी लौटने की संभावना जताई जा रही है।

सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में गिरावट दर्ज की गई और यह करीब 200 अंक तक कमजोर हुआ। वहीं निफ्टी भी 24,150 के स्तर के नीचे फिसल गया। बाजार में बैंकिंग और कुछ बड़े शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। भारती एयरटेल और कोटक बैंक जैसे शेयर दबाव में रहे।

हालांकि, बाजार में बड़ी गिरावट नहीं देखने को मिली क्योंकि घरेलू निवेशकों की खरीदारी और मजबूत आर्थिक संकेतों ने गिरावट को सीमित रखा। निवेशक अब कंपनियों के तिमाही नतीजों, वैश्विक बाजारों की दिशा और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।

कच्चे तेल और रुपये पर नजर

ईरान से जुड़े घटनाक्रमों का सीधा असर कच्चे तेल के बाजार पर पड़ सकता है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिससे भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ेगा।

वहीं रुपये की चाल भी निवेशकों के लिए अहम बनी हुई है। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आने पर आयात महंगा हो सकता है और इसका असर बाजार की धारणा पर पड़ सकता है। शुरुआती कारोबार में रुपया हल्की कमजोरी के साथ नजर आया।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। वैश्विक घटनाओं के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों को मजबूत कंपनियों पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में गिरावट के दौरान अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश के अवसर बन सकते हैं, लेकिन निवेश से पहले कंपनी के फंडामेंटल, सेक्टर की स्थिति और जोखिम को समझना जरूरी है।

आगे की राह

आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और वैश्विक बाजारों के प्रदर्शन से तय होगी। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक किसी बड़े संकेत का इंतजार कर रहे हैं।

मौजूदा हालात में सेंसेक्स और निफ्टी में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बाजार की नजर अब इस बात पर होगी कि अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होता है या आने वाले दिनों में इसका असर और गहरा होता है।

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