नई दिल्ली: ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड और साइबर ठगी के खिलाफ भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने सख्ती बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम प्रस्तावित किया है। नए 'मनी म्यूल' नियमों के तहत बैंकों को धोखाधड़ी से जुड़े संदिग्ध खातों में डेबिट लेनदेन को अधिकतम 60 दिनों तक फ्रीज करने की व्यवस्था देने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में तेजी से ट्रांसफर कर निकालने वाले नेटवर्क पर रोक लगाना है।
'मनी म्यूल' ऐसे बैंक खातों या व्यक्तियों के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है जिनके खातों का उपयोग अपराध से हासिल रकम को प्राप्त करने, आगे भेजने या निकालने में किया जाता है। कई बार खाताधारक जानबूझकर अपने खाते का इस्तेमाल करवाते हैं, जबकि कुछ मामलों में लोगों को नौकरी, कमीशन या दूसरे लालच देकर उनके बैंक खातों का दुरुपयोग किया जाता है।
60 दिनों तक डेबिट फ्रीज का प्रस्ताव
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अगर किसी बैंक खाते के साइबर फ्रॉड या संदिग्ध वित्तीय गतिविधि में इस्तेमाल होने के पर्याप्त संकेत मिलते हैं तो उस खाते से रकम निकालने या ट्रांसफर करने पर अस्थायी रोक लगाई जा सकेगी। यह डेबिट फ्रीज अधिकतम 60 दिनों की अवधि तक हो सकता है।
इस दौरान संबंधित मामले की जांच और खाते में आए धन के स्रोत तथा आगे किए गए लेनदेन की पड़ताल की जा सकेगी। इसका मकसद संदिग्ध रकम को तुरंत दूसरे खातों में भेजे जाने या नकद निकाल लिए जाने से रोकना है।
साइबर ठगी में कैसे इस्तेमाल होते हैं मनी म्यूल अकाउंट?
डिजिटल ठगी करने वाले अपराधी अक्सर सीधे अपने नाम के बैंक खातों में रकम नहीं मंगाते। इसके बजाय कई बैंक खातों की एक श्रृंखला तैयार की जाती है। पीड़ित से ठगी गई रकम पहले एक खाते में आती है और फिर तेजी से कई अन्य खातों में भेज दी जाती है।
इस तरीके से पैसे का वास्तविक लाभार्थी पता लगाना मुश्किल हो जाता है। मनी म्यूल खातों पर समय रहते रोक लगने से ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने और संभावित रिकवरी की संभावना बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
आम ग्राहकों के लिए क्या मायने?
नए प्रस्ताव का मतलब यह नहीं है कि सामान्य बैंक खातों को बिना कारण फ्रीज कर दिया जाएगा। संदिग्ध गतिविधियों की पहचान बैंकों के जोखिम संकेतों, लेनदेन के पैटर्न और संबंधित शिकायतों जैसे आधारों पर की जा सकती है। नियमों का अंतिम स्वरूप RBI की अंतिम अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा।
ग्राहकों को भी अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, यूपीआई या इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति को पैसे प्राप्त करने या आगे भेजने के लिए नहीं देना चाहिए। कमीशन के बदले खाते में रकम मंगाने जैसे प्रस्ताव साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।
साइबर फ्रॉड पर लगेगी लगाम
डिजिटल भुगतान के तेजी से बढ़ने के साथ साइबर धोखाधड़ी के तरीके भी बदल रहे हैं। ऐसे में बैंकिंग सिस्टम में संदिग्ध रकम की आवाजाही को जल्दी पहचानना महत्वपूर्ण हो गया है।
RBI का प्रस्ताव इसी दिशा में मनी म्यूल खातों के खिलाफ बैंकों को मजबूत व्यवस्था देने की कोशिश है। हालांकि 60 दिन का डेबिट फ्रीज अभी प्रस्तावित नियम का हिस्सा है। इसके लागू होने की वास्तविक प्रक्रिया और खाताधारकों के लिए अपील या समीक्षा की व्यवस्था अंतिम नियम जारी होने के बाद स्पष्ट होगी।
Tags: