
वर्ल्ड | अमेरिका में एक अदालत ने ट्रंप प्रशासन को झटका देते हुए दो ट्रांसजेंडर सैनिकों को हटाने पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह फैसला ट्रांसजेंडर लोगों के सैन्य सेवा करने के अधिकार को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
क्या है मामला?
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के सेना में सेवा देने पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे। इस नीति के तहत ट्रांसजेंडर सैनिकों को सेवा से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। हाल ही में दो ट्रांसजेंडर सैनिकों को हटाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन अदालत ने इसमें हस्तक्षेप कर दिया और फिलहाल उनकी बर्खास्तगी पर रोक लगा दी।
अदालत का फैसला
फेडरल कोर्ट ने कहा कि बिना पर्याप्त कानूनी आधार के किसी भी सैनिक को उनकी लैंगिक पहचान के आधार पर हटाना अनुचित होगा। न्यायाधीश ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यह मामला न केवल सेना के भीतर समावेशन से जुड़ा है, बल्कि यह नागरिक अधिकारों से भी संबंधित है।
ट्रंप प्रशासन का रुख
ट्रंप प्रशासन ने पहले यह तर्क दिया था कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की सैन्य सेवा से सेना की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और अतिरिक्त चिकित्सा लागत बढ़ सकती है। हालांकि, इस नीति का कई मानवाधिकार संगठनों, डेमोक्रेटिक नेताओं और LGBTQ+ समुदाय ने विरोध किया था।
क्या होगा आगे?
इस फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन को अपनी नीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। हालांकि, इस मामले पर आगे की कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी और अंतिम फैसला आने में समय लग सकता है। इस फैसले से ट्रांसजेंडर अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित हो सकती है।





