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Ramaphosa ने श्वेतों के उत्पीड़न के आरोप किए खारिज

Uma Verma
25 March 2025 8:16 AM IST
Ramaphosa ने श्वेतों के उत्पीड़न के आरोप  किए खारिज
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वर्ल्ड | दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने देश में श्वेत लोगों के उत्पीड़न के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। यह बयान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और टेस्ला प्रमुख एलन मस्क के उन आरोपों के जवाब में आया है, जिनमें उन्होंने कहा था कि दक्षिण अफ्रीका में श्वेत नागरिकों के साथ भेदभाव और हिंसा हो रही है। रामाफोसा ने स्पष्ट किया कि उनका देश कानून के शासन पर चलता है और किसी भी समुदाय के खिलाफ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

रामाफोसा का कड़ा संदेश

रामाफोसा ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जाती है और नस्ल के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता। उन्होंने इस दावे को "राजनीतिक प्रोपेगेंडा" करार देते हुए कहा कि कुछ लोग बिना तथ्यों की पुष्टि किए देश की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनका प्रशासन सभी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार कदम उठा रहा है। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने नस्लीय भेदभाव को खत्म करने के लिए लंबा संघर्ष किया है, और अब कोई भी शक्ति उसे फिर से जातीय तनाव में नहीं धकेल सकती।

ट्रंप और मस्क ने क्या कहा था?

डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क ने हाल ही में सोशल मीडिया पर दावा किया था कि दक्षिण अफ्रीका में श्वेत किसानों और नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। मस्क ने इसे "नस्लीय भेदभाव" करार देते हुए कहा था कि वैश्विक मीडिया इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है। वहीं, ट्रंप ने भी इसे लेकर दक्षिण अफ्रीका की सरकार की निंदा की थी।

सच्चाई क्या है?

विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण अफ्रीका में अपराध दर ऊंची है और हिंसा के मामले आम हैं, लेकिन इसे किसी एक समुदाय के खिलाफ साजिश बताना पूरी तरह गलत होगा। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, हमलों का शिकार सभी नस्लों के लोग होते हैं, और इसे नस्लीय उत्पीड़न कहना भ्रामक हो सकता है।

रामाफोसा के इस बयान के बाद दक्षिण अफ्रीका में नस्लीय तनाव को लेकर बहस और तेज़ हो गई है। सरकार का कहना है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठा रही है और किसी भी तरह के भेदभाव की अनुमति नहीं दी जाएगी

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