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हिमालयन टैटू समिट में दिखा अनोखा हुनर शरीर पर उकेरे देवी-देवता
Ratna Netam
3 Oct 2026 7:10 PM IST

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काठमांडू। नेपाल में आयोजित ‘हिमालयन टैटू समिट 0.3’ में कला, संस्कृति, धार्मिक प्रतीकों और आधुनिक डिजाइन का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। यहां इंसानी शरीर कलाकारों के लिए कैनवस बन गया है, जिस पर देवी-देवताओं, धार्मिक प्रतीकों, पारंपरिक आकृतियों और आधुनिक किरदारों को टैटू के रूप में उकेरा जा रहा है। सम्मेलन में नेपाल के साथ पड़ोसी भारत से आए 100 से अधिक टैटू आर्टिस्ट अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं।इस समिट की खासियत केवल टैटू बनाना नहीं, बल्कि पारंपरिक मान्यताओं और आधुनिक कला के बीच नया तालमेल पेश करना है। यहां गणेश, बुद्ध, हनुमान और नेपाल की जीवित देवी कुमारी से प्रेरित टैटू लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। इनके साथ कॉमिक किरदारों और आधुनिक डिजाइन को मिलाकर भी कई प्रयोग किए जा रहे हैं।
इंसानी शरीर बना कलाकारों का कैनवस
टैटू कला में शरीर ही कलाकार का कैनवस होता है। हिमालयन टैटू समिट में भी अलग-अलग कलाकार अपनी कल्पना और तकनीक के जरिए शरीर के विभिन्न हिस्सों पर जटिल डिजाइन तैयार कर रहे हैं। किसी के हाथ पर भगवान गणेश की तस्वीर दिखाई दे रही है तो किसी की पीठ पर भगवान बुद्ध से प्रेरित बड़ी कलाकृति बनाई जा रही है।कुछ कलाकार पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों को उनके मूल स्वरूप में उकेर रहे हैं, जबकि कई कलाकार उन्हें आधुनिक रंग, पैटर्न और दूसरी कलात्मक शैलियों के साथ पेश कर रहे हैं। इससे सदियों पुराने धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को टैटू कला के माध्यम से एक नया रूप मिल रहा है।
नेपाल और भारत के 100 से ज्यादा कलाकार
सम्मेलन में नेपाल और भारत से आए 100 से अधिक टैटू आर्टिस्ट हिस्सा ले रहे हैं। अलग-अलग क्षेत्रों से आए कलाकारों की अपनी विशेष शैली है। कुछ कलाकार ब्लैक एंड ग्रे टैटू में माहिर हैं, जबकि कुछ रंगीन और बड़े डिजाइन तैयार कर रहे हैं।कलाकारों के लिए यह आयोजन अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ दूसरे टैटू आर्टिस्ट की तकनीक को समझने का भी अवसर है। अलग-अलग पृष्ठभूमि के कलाकार एक ही मंच पर काम कर रहे हैं, जिससे टैटू कला की विभिन्न शैलियां एक साथ देखने को मिल रही हैं।भारत और नेपाल के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक समानताओं का प्रभाव भी टैटू डिजाइन में साफ दिखाई देता है। गणेश, हनुमान और बुद्ध जैसे धार्मिक प्रतीक दोनों देशों में व्यापक रूप से पहचाने जाते हैं। यही वजह है कि इनसे प्रेरित टैटू सम्मेलन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं।
गणेश से बुद्ध तक के डिजाइन
समिट में धार्मिक विषयों पर आधारित टैटू विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। भगवान गणेश को अलग-अलग कलात्मक रूपों में उकेरा जा रहा है। कहीं उनका पारंपरिक स्वरूप है तो कहीं आधुनिक ग्राफिक्स और रंगों के साथ नया रूप दिया गया है।भगवान बुद्ध की शांत मुद्रा से प्रेरित टैटू भी बड़ी संख्या में दिखाई दे रहे हैं। बुद्ध से जुड़े डिजाइन में ध्यान, शांति और आध्यात्मिकता से संबंधित प्रतीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।इसी तरह भगवान हनुमान के चेहरे और उनकी विभिन्न मुद्राओं पर आधारित डिजाइन भी बनाए जा रहे हैं। कई लोग धार्मिक प्रतीकों से व्यक्तिगत आस्था या सांस्कृतिक जुड़ाव के कारण ऐसे टैटू चुन रहे हैं।
जीवित देवी कुमारी की छवि भी बनी आकर्षण
नेपाल की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा में जीवित देवी ‘कुमारी’ का विशेष स्थान है। हिमालयन टैटू समिट में कुमारी की छवि को भी टैटू कला में उतारा जा रहा है। कुमारी से प्रेरित डिजाइन में पारंपरिक श्रृंगार, आंखों और चेहरे की विशिष्ट शैली को प्रमुखता दी जा रही है।नेपाल की स्थानीय संस्कृति से जुड़े ऐसे डिजाइन इस आयोजन को केवल आधुनिक टैटू प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रखते, बल्कि इसे स्थानीय परंपराओं से भी जोड़ते हैं।टैटू कलाकार इन पारंपरिक आकृतियों को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़कर नया प्रयोग कर रहे हैं। कहीं पारंपरिक चेहरे के आसपास ज्यामितीय आकृतियां बनाई गई हैं तो कहीं रंगों और आधुनिक पैटर्न का इस्तेमाल किया गया है।
कॉमिक किरदारों का भी क्रेज
धार्मिक डिजाइन के साथ सम्मेलन में कॉमिक और काल्पनिक किरदारों से प्रेरित टैटू भी देखने को मिल रहे हैं। युवाओं में लोकप्रिय आधुनिक किरदारों को कलाकार अपनी अलग शैली में शरीर पर उकेर रहे हैं।इस तरह एक ही मंच पर धार्मिक और आध्यात्मिक प्रतीकों के साथ आधुनिक पॉप कल्चर से जुड़े डिजाइन भी दिखाई दे रहे हैं। कुछ कलाकार इन दोनों शैलियों को मिलाकर ऐसे टैटू तैयार कर रहे हैं, जिनमें पारंपरिक कला के साथ आधुनिक सोच की झलक मिलती है।
टैटू कला में बढ़ रहा प्रयोग
टैटू अब केवल छोटे नाम, प्रतीक या साधारण डिजाइन तक सीमित नहीं रहा है। आधुनिक टैटू आर्टिस्ट शरीर के बड़े हिस्से पर विस्तृत कलाकृतियां तैयार कर रहे हैं। इनमें चेहरे, धार्मिक चरित्र, प्रकृति, जानवर, पौराणिक कथाएं और काल्पनिक किरदार तक शामिल हैं।हिमालयन टैटू समिट में कलाकारों द्वारा इस्तेमाल की जा रही अलग-अलग तकनीकें भी इस बदलाव को दिखाती हैं। बारीक रेखाओं से लेकर शेडिंग और रंगों के संयोजन तक, हर कलाकार अपनी शैली के जरिए डिजाइन को अलग पहचान देने की कोशिश कर रहा है।
परंपरा और आधुनिकता का मेल
हिमालयन टैटू समिट 0.3 की सबसे खास बात पारंपरिक मूल्यों और आधुनिक डिजाइन का मेल है। धार्मिक प्रतीकों को टैटू के रूप में शरीर पर उकेरना कई लोगों के लिए आस्था और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति दोनों का माध्यम है। वहीं आधुनिक डिजाइन युवा पीढ़ी की बदलती पसंद को सामने रखते हैं।टैटू बनवाने वाले लोगों के लिए हर डिजाइन का अर्थ अलग हो सकता है। कोई अपनी धार्मिक आस्था को शरीर पर स्थायी रूप देना चाहता है तो कोई अपनी पसंद, विचार या जीवन से जुड़ी किसी याद को टैटू के जरिए सहेजना चाहता है।
कला और संस्कृति का साझा मंच
नेपाल और भारत के कलाकारों की भागीदारी ने इस सम्मेलन को क्षेत्रीय टैटू संस्कृति का बड़ा मंच बना दिया है। कलाकारों को यहां अपनी कला प्रदर्शित करने के साथ नई शैलियों और तकनीकों से परिचित होने का अवसर मिल रहा है।‘हिमालयन टैटू समिट 0.3’ में दिखाई दे रहे डिजाइन बताते हैं कि टैटू कला किस तरह लगातार बदल रही है। गणेश, कुमारी, बुद्ध और हनुमान जैसे पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों से लेकर आधुनिक कॉमिक किरदारों तक, शरीर पर उकेरी जा रही हर कलाकृति अपनी अलग कहानी कह रही है। सम्मेलन में परंपरा, आस्था और आधुनिक कला का यही मिश्रण लोगों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बना हुआ है।
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