
बगदाद: इराकी मिलिशिया 'हरकत हिज़्बुल्लाह अल-नुजाबा' के नेता शेख अकरम अल-काबी ने पिछले महीने हुए अमेरिका-सऊदी संयुक्त हमलों का सैन्य जवाब देने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि "मिसाइलों का जवाब सिर्फ़ मिसाइलों से ही दिया जा सकता है" और इराक में काम करने वाले ईरान-समर्थित अर्धसैनिक समूह 'पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फोर्सेज़' (PMF) के सदस्यों की मौत का बदला लेने की बात कही।
PMF से जुड़े इस मिलिशिया समूह के महासचिव अल-काबी ने शनिवार को एक बयान में ये बातें कहीं। उन्होंने सऊदी अरब के साथ कूटनीति को खारिज कर दिया और रियाद पर इराक और उसके लोगों के खिलाफ हमलों में शामिल होने का आरोप लगाया। अल-काबी ने कहा, "घृणित वहाबी अल-सऊद शासन के साथ कूटनीति का विकल्प बेकार है।" उन्होंने आरोप लगाया कि सऊदी अरब "इराक और उसके लोगों को निशाना बनाने वाली कई साजिशों" के पीछे था।मिलिशिया नेता ने सऊदी अरब पर इराक में कार बम धमाकों समेत अन्य हमलों का समर्थन करने का भी आरोप लगाया और कहा कि PMF सदस्यों की मौत का जवाब सैन्य कार्रवाई से ही दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, "यह केवल एक उचित सैन्य प्रतिक्रिया के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है, जो पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फोर्सेज़ के हमारे उन नेक शहीदों के खून के प्रति कर्तव्य को पूरा करे, जो इसके धोखे का शिकार हुए।"अल-काबी ने मारे गए लोगों के लिए वित्तीय मुआवजे के मूल्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि कोई भी धनराशि मृतकों के परिवारों की भरपाई नहीं कर सकती।उन्होंने कहा, "आप किस मुआवजे की बात कर रहे हैं जो उनके पवित्र खून के बराबर हो, और कौन सा पैसा उनके अनाथ बच्चों, शोक संतप्त माताओं और विधवा पत्नियों के जीवन में खुशियां वापस ला सकता है?"बदले की कार्रवाई की चेतावनी के साथ अपना बयान खत्म करते हुए अल-काबी ने कहा, "मिसाइलों का जवाब सिर्फ़ मिसाइलों से और आग का जवाब आग से ही दिया जा सकता है।"
उनके ये बयान अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के उस बयान के कुछ दिनों बाद आए हैं जिसमें कहा गया था कि सऊदी अरब के सशस्त्र बलों और CENTCOM ने संयुक्त रूप से इराक में ईरान-समर्थित उग्रवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए, जिनमें लॉजिस्टिक्स और हथियारों के संचालन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जगहों को निशाना बनाया गया।CENTCOM ने कहा कि ये हमले 28 जुलाई को उन समूहों के खिलाफ किए गए थे जिन्हें उसने ईरान-समर्थित आतंकवादी बताया था। इन समूहों को IRGC ने अमेरिकी बलों और सऊदी ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने का निर्देश दिया था। CENTCOM ने कहा, "पिछले 72 घंटों में IRGC के कहने पर हुए 30 से ज़्यादा हवाई ड्रोन हमलों के जवाब में, अमेरिका और सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने पूर्वी इराक में आतंकवादियों के कई लॉजिस्टिक्स और हथियारों के ठिकानों पर हमले किए।"अमेरिकी सेना ने कहा कि अमेरिकी फ़ोर्स पर हाल ही में हुए ड्रोन हमले नाकाम रहे।
CENTCOM ने आगे कहा, "अमेरिकी फ़ोर्स पर किए गए ये बेमतलब के हमले कामयाब नहीं हुए।"कमांड ने यह भी दावा किया कि फरवरी और अप्रैल 2026 के बीच, इराक में काम कर रहे ईरान-समर्थित चरमपंथी समूहों ने अमेरिकी नागरिकों और ठिकानों पर हमले की 600 से ज़्यादा कोशिशें कीं।
CENTCOM ने चेतावनी दी, "IRGC और उसके आतंकवादी सहयोगियों को ये हमले बंद करने होंगे, वरना उन्हें अमेरिकी सेना की और जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।"ईरान के सरकारी मीडिया, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) के मुताबिक, इन हमलों में 20 लोग मारे गए और 32 अन्य घायल हो गए।IRIB द्वारा जारी एक बयान में PMF ने कहा, "शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका और सऊदी अरब के संयुक्त हमलों में हमारे कम से कम 20 जवान शहीद हुए और 32 अन्य घायल हो गए। इन हमलों में इराक के अलग-अलग प्रांतों में 'पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फ़ोर्स' (PMF) के कई आधिकारिक मुख्यालयों को निशाना बनाया गया।"





