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Science News :वैज्ञानिकों ने एक हैरान करने वाली खोज की है, जिससे पता चला है कि खारे पानी के मगरमच्छ पहले की सोच से कहीं ज़्यादा फैले हुए थे। नए DNA रिसर्च से पता चलता है कि ये मगरमच्छ हिंद महासागर पार करके सेशेल्स द्वीपों तक पहुँचे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग 250 साल पहले सेशेल्स में मगरमच्छों की एक बड़ी आबादी रहती थी। हालांकि, जब 18वीं सदी के आखिर में इंसान वहाँ बसे, तो उन्होंने इन मगरमच्छों का शिकार करके उन्हें खत्म कर दिया।
वैज्ञानिकों ने यह खोज कैसे की?
शुरुआत में, वैज्ञानिकों का मानना था कि सेशेल्स के मगरमच्छ अफ्रीका के नील मगरमच्छ परिवार के थे। हालांकि, रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस जर्नल में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, जब वैज्ञानिकों ने म्यूज़ियम में रखी पुरानी खोपड़ियों और दाँतों के DNA की जाँच की, तो उन्होंने पाया कि ये मगरमच्छ असल में खारे पानी के मगरमच्छ थे।
उनकी यात्रा कितनी लंबी थी?
इस खोज का मतलब है कि इन मगरमच्छों का दायरा पूरब से पश्चिम तक 12,000 किलोमीटर से ज़्यादा फैला हुआ था। इतने बड़े महासागर को पार करना कोई छोटी बात नहीं है। खारे पानी के मगरमच्छ समुद्र में यात्रा करने के लिए बहुत अच्छी तरह से अनुकूलित होते हैं। उनकी जीभ पर खास नमक ग्रंथियाँ होती हैं जो उन्हें अपने शरीर से ज़्यादा नमक निकालने में मदद करती हैं।
जर्मनी में पॉट्सडैम यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक स्टेफ़नी एग्नेस का कहना है कि यह खोज दिखाती है कि मगरमच्छों की यह प्रजाति कितनी गतिशील थी और अलग-अलग क्षेत्रों में आबादी कितनी आपस में जुड़ी हुई थी। उनके न्यूक्लियर DNA पर और रिसर्च की जाएगी ताकि उनके क्षेत्रीय अंतरों को और ज़्यादा विस्तार से समझा जा सके।
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