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Science News: लगभग 65 मिलियन साल पहले, पृथ्वी पर एक बड़ी आपदा आई, जिसने डायनासोर सहित आधे से ज़्यादा पेड़-पौधों और जानवरों की ज़िंदगी खत्म कर दी। वैज्ञानिक भाषा में, इस घटना को क्रेटेशियस-पैलियोजीन (K-Pg) विलुप्त होने की घटना के नाम से जाना जाता है। अब तक यह माना जाता था कि इस घटना ने पृथ्वी पर सब कुछ पूरी तरह से बदल दिया था, जलवायु और जंगलों से लेकर जानवरों और नदियों तक। हालांकि, एक नई रिसर्च स्टडी ने इस सोच को चुनौती दी है।
टीवी टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के मोंटाना राज्य में लाखों साल पुरानी नदियों पर रिसर्च किया गया। इस रिसर्च की हालिया स्टडी से पता चला कि जब डायनासोर विलुप्त हो गए थे, तब भी वहां की नदियां बिना किसी बड़े बदलाव के बहती रहीं। इसका मतलब है कि इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा के बावजूद, नदियों की दिशा, बहाव और बनावट पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ा।
यह रिसर्च कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले के वैज्ञानिकों ने किया था। अपनी स्टडी के दौरान, उन्होंने मोंटाना में हेल क्रीक और फोर्ट यूनियन की चट्टानों की परतों का गहराई से एनालिसिस किया। माना जाता है कि ये परतें उस समय की हैं जब डायनासोर पृथ्वी से गायब हो गए थे।
अपने रिसर्च के लिए, वैज्ञानिकों ने लगभग 5,000 वर्ग किलोमीटर के इलाके का मैप बनाया। इसके बाद उन्होंने सैटेलाइट इमेजिंग और ग्राउंड सर्वे किए। यह समझने के लिए किया गया कि उस समय नदियां किस दिशा में बहती थीं और उनका रूप कैसा था।
रिसर्च का चौंकाने वाला नतीजा यह था कि जब डायनासोर पृथ्वी से गायब हो रहे थे, तब भी उन नदियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ था। नदियों की दिशा में बड़े बदलाव इस घटना के लगभग 400,000 साल बाद दिखाई दिए।
रिसर्च में शामिल वैज्ञानिकों के अनुसार, पहले यह माना जाता था कि जब कोई बड़ा पर्यावरणीय संकट आता है, तो नदियां भी बदल जाती हैं। उदाहरण के लिए, घुमावदार नदियां अचानक कई चैनलों वाली उथली नदियों में बदल सकती हैं। लेकिन इस स्टडी ने दिखाया है कि ऐसा हमेशा नहीं होता।
इस रिसर्च ने साबित किया है कि नदी प्रणालियां काफी लचीली होती हैं। भले ही आसपास के जंगल, जानवर और पूरा इकोसिस्टम खत्म हो जाए, नदियां लंबे समय तक स्थिर रह सकती हैं। उन पर बाहरी प्राकृतिक प्रभावों का तुरंत असर नहीं पड़ता।
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