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Science: वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर पृथ्वी का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है, तो 2050 तक बहुत ज़्यादा गर्मी झेलने वाले लोगों की संख्या दोगुनी से ज़्यादा हो जाएगी। 2010 में, लगभग 1.5 अरब लोग खतरनाक रूप से गर्म हालात में रह रहे थे। हालांकि, 2050 तक, यह संख्या बढ़कर 3.8 अरब हो सकती है, जिसका मतलब है कि दुनिया की 41% आबादी झुलसाने वाली गर्मी की चपेट में होगी। अगर हम प्रदूषण कम नहीं करते हैं, तो दुनिया अगले कुछ दशकों में इस खतरनाक स्तर पर पहुँच जाएगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके असर 2030 की शुरुआत तक दिखने लगेंगे।
रिसर्च में क्या पता चला?
रिसर्च में पाया गया कि तापमान में थोड़ी सी भी बढ़ोतरी से गर्मी तेज़ी से फैलती है। रिसर्च में कूलिंग डिग्री डेज़ का इस्तेमाल करके यह मापा गया कि गर्मी हमारे सामान्य रहने के माहौल को कितना ज़्यादा गर्म और असहज बना देगी। इसका मतलब है कि हमें खुद को ठंडा रखने के लिए बहुत ज़्यादा मेहनत करनी पड़ेगी।
एक नई स्टडी के अनुसार, 1992 और 2024 के बीच हीटवेव वाले दिनों की संख्या 15 गुना बढ़ गई है। पिछले 10 सालों में स्थिति और खराब हुई है, जिसमें बहुत ज़्यादा तापमान वाले दिनों में 19 गुना बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में अब गर्मी पहले से कहीं ज़्यादा समय तक रहती है।
इस भीषण गर्मी से अस्पतालों में भीड़ बढ़ जाती है और बिजली की इतनी ज़्यादा मांग होती है कि पावर ग्रिड फेल होने लगते हैं। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी, लाखों और लोगों को खुद को ठंडा रखने के लिए एयर कंडीशनिंग की ज़रूरत पड़ेगी। इस भारी मांग को पूरा करना पावर कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाएगा, जिससे बार-बार बिजली कटौती या सिस्टम फेल होने का खतरा बढ़ जाएगा।
तेज़ गर्मी से हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन से जुड़ी बीमारियाँ बढ़ रही हैं। गर्मी लोगों के लिए कड़ी मेहनत करना भी मुश्किल बना रही है और फसलों पर भी बुरा असर डाल रही है। सबसे ज़्यादा कमज़ोर छोटे बच्चे, बुज़ुर्ग और मज़दूर हैं जो धूप में बाहर काम करते हैं। इन लोगों के लिए यह गर्मी जानलेवा साबित हो रही है। क्या दुनिया इससे निपटने के लिए तैयार है?
इस रिसर्च के लेखकों का कहना है कि दुनिया इस भीषण गर्मी से निपटने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है। हमें न सिर्फ़ प्रदूषण कम करने की ज़रूरत है, बल्कि ऐसे घर और सड़कें बनाने की भी ज़रूरत है जो गर्मी को झेल सकें। हमें शहरों को ठंडा रखने के लिए नई टेक्नोलॉजी भी अपनानी होगी। भारत पहले ही गर्मी के सारे रिकॉर्ड तोड़ रहा है, और यह रिपोर्ट एक चेतावनी है कि हमें जल्द से जल्द अपने तरीके बदलने होंगे।
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