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Science: यह नई रिसर्च साइंस जर्नल न्यू फाइटोलॉजिस्ट में पब्लिश हुई है। इसमें, वैज्ञानिकों ने हॉर्नियोफाइटन लिग्निएरी नाम के एक बहुत पुराने पौधे के फॉसिल पर गहराई से रिसर्च की है। यह फॉसिल लगभग 400 मिलियन साल पुराना है और स्कॉटलैंड के राइनी चर्ट इलाके में मिला था। कई सालों से यह माना जाता था कि पौधों का विकास एक सीधी लाइन में हुआ: पहले शैवाल, फिर मॉस जैसे छोटे पौधे, और बाद में पेड़ और दूसरे पौधों का विकास हुआ। हाल की जेनेटिक स्टडीज़ ने इस विचार को चुनौती दी है। अब, यह नया फॉसिल इस उलझन को कुछ हद तक सुलझाता हुआ लग रहा है।
हॉर्नियोफाइटन खास क्यों है?
इस पौधे की सबसे खास बात इसकी अंदरूनी बनावट है। आजकल के पौधों में, पानी और पोषक तत्वों को ले जाने के लिए अलग-अलग रास्ते होते हैं। हॉर्नियोफाइटन में ऐसा नहीं था। इस पौधे में, पानी और पोषक तत्व दोनों पूरे पौधे में एक ही रास्ते से जाते थे। इस रिसर्च के लीड साइंटिस्ट पॉल केनरिक बताते हैं कि ऐसा सिस्टम आज किसी भी जीवित पौधे में नहीं देखा जाता है। इससे पता चलता है कि पुराने पौधे हमारी सोच से कहीं ज़्यादा जटिल थे।
पौधे के अंदर क्या मिला?
आजकल के पौधों में दो मुख्य सिस्टम होते हैं: एक पानी के लिए और दूसरा पोषक तत्वों के लिए। इन्हें पूरे पौधे में अलग-अलग रास्तों से ले जाया जाता है, जिससे पौधे लंबे और मज़बूत हो पाते हैं। इस पुराने पौधे में, वैज्ञानिकों ने ऐसी कोशिकाएँ देखीं जो एक साथ पानी और पोषक तत्व दोनों ले जाती थीं। इससे पता चलता है कि शुरुआत में, पौधों में सिर्फ़ एक साधारण सिस्टम था, जो बाद में दो अलग-अलग सिस्टम में बँट गया।
यह ध्यान देने वाली बात है कि इस खोज में मॉडर्न टेक्नोलॉजी ने अहम भूमिका निभाई। वैज्ञानिकों ने खास स्कैनिंग टेक्नीक का इस्तेमाल करके फॉसिल का 3D मॉडल बनाया। इससे वे पौधे की अंदरूनी बनावट को साफ़-साफ़ देख पाए। इन तस्वीरों से पता चला कि यह पौधा न तो पूरी तरह से मॉडर्न था और न ही पूरी तरह से पुराना। यह एक बीच का रूप था, जो पुराने और मॉडर्न पौधों के बीच की खाई को भरता है।
इस खोज से वैज्ञानिकों का मानना है कि पौधों के विकास का रास्ता उतना आसान नहीं था जितना पहले सोचा जाता था। हॉर्नियोफाइटन इस बात पर रोशनी डाल सकता है कि पौधे पानी से कैसे निकले, ज़मीन पर जीवन के लिए कैसे ढले, और धीरे-धीरे बड़े कैसे हुए।
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