धर्म-अध्यात्म

क्यों कहा जाता है इसे विष्णु की नींद का दिन

Dolly
4 Jun 2025 6:02 PM IST
क्यों कहा जाता है इसे विष्णु की नींद का दिन
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धर्म : मान्यता है कि वामन अवतार में राजा बलि को वरदान देते हुए भगवान विष्णु ने यह वचन दिया था कि वे हर साल आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक पाताल लोक में रहेंगे।
इस दौरान वह योग निद्रा में रहते हैं। इन चार महीनों को चातुर्मास के नाम से जानते हैं जिनमें धार्मिक गतिविधियां होती हैं। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाएंगे। इस साल देवशयनी एकादशी 6 जुलाई को है। तो क्या इसका मतलब है कि भगवान भी सोते हैं। वह सोने के लिए कहां जाते हैं और वह ऐसा क्यों करते हैं।
यदि आपके भी मन में ये सवाल है, तो आज हम आपको इसके पीछे की पूरी कहानी बताते हैं। ज्योतिषीय कारण यह है कि इस समय सूर्य दक्षिणायन होने लगता है, जिस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। इस चार महीनों में वर्षा ऋतु होने की वजह से पहले के समय में एक जगह से दूसरी जगह आना-जाना मुश्किल होता था।
वहीं, मौसम जन्य बीमारियों के फैलने की वजह से लोग इस दौरान सात्विक खाना-पीना करते थे। इसी वजह से इस दौरान मांगलिक कार्यों को बंद कर दिया जाता था। वहीं, धार्मिक कारण पौराणिक कथा राजा बलि से जुड़े एक वचन के कारण मानी जाती है। वामन अवतार में दिया था वर वामन अवतार लेकर राजा बलि का उद्धार करने के बाद भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया, साथ ही वर मांगने को कहा। तब बलि अपने साथ पाताल लोक में भगवान विष्णु के निवास करने का वर मांगा। अपने वचन से बंधे भगवान विष्णु पाताल लोक चले गए।
यह देखकर माता लक्ष्मी समेत सभी देवी और देवता चिंतित हो गए। माता लक्ष्मी गरीब महिला का रूप रखकर राजा बलि के पास पहुंचीं। उसे राखी बांधकर अपना भाई बना लिया और इसके बदले में भगवान विष्णु को उनके वचन से मुक्त करके बैकुंठ धाम ले जाने की बात कही। बलि ने भगवान विष्णु को वचन से मुक्त कर दिया। तब बलि को भगवान ने वरदान दिया कि वे हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक पाताल लोक में योग निद्रा में रहेंगे। इस दौरान धरती पर चातुर्मास मनाया जाता है, जब धार्मिक गतिविधियां की जाती हैं।
तो क्या सच में सोते हैं भगवान : भगवान विष्णु को इस समय योग निद्रा में रहते हैं, जो एक प्रकार की गहरी समाधि है, न कि साधारण नींद। गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है, ‘या निशा सर्वभूतानाम् तस्यां जागर्ति संयमी’। इसका अर्थ यह है कि जब सबके लिए रात्रि होती है, योगी तब भी जागता रहता है। यानी रात में शारीरिक रूप से योगी सोता है, लेकिन सोते हुए भी वह चैतन्य के तल पर जागता रहता है।
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