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धर्म-अध्यात्म
Shivling Prasad Niyam: शिवलिंग पर चढ़ा हुआ प्रसाद ग्रहण करना चाहिए या नहीं? जानें शिव पुराण में बताया गया नियम
Sarita
15 Feb 2026 10:02 AM IST

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Shivling Prasad Niyam: महाशिवरात्रि के त्यौहार को हिंदू धर्म में बेहद शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। शिवलिंग पर जल, दूध, बेल पत्र, धतूरा, फल और मिष्ठान समेत कई चीजें चढ़ाई जाती हैं। शिवलिंग पर चढ़ाए गए प्रसाद को ग्रहण करने पर भी लोगों की अलग-अलग राय है। कुछ लोगों का कहना है कि शिवलिंग पर चढ़ाए गए प्रसाद को ग्रहण नहीं करना चाहिए। इस बात में कितनी सच्चाई है? शिव पुराण में इसको लेकर विस्तार से बताया गया है। आइए जानते हैं कि भगवान शिव का प्रसाद नहीं ग्रहण करना चाहिए या नहीं।
शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद ग्रहण करना चाहिए या नहीं?
शिव पुराण में कहा गया है कि जो भगवान शिव का भक्त है और नियम अनुसार व्रत का पालन करने वाला है उसे भगवान शिव का प्रसाद अवश्य ग्रहण करना चाहिए। भगवान शिव पर चढ़े प्रसाद को देख लेने मात्र से भी व्यक्ति के सारे पाप दूर भाग जाते हैं। ऐसे में उस प्रसाद को खाने से करोड़ों पुण्य आपने भीतर आ जाते हैं। भगवान के प्रसाद को हमेशा सिर झुकाकर प्रसन्नता के साथ ग्रहण करने चाहिए।
शिवलिंग पर चढ़े प्रसाद का महत्व:
भगवान शिव की दीक्षा लेने वाले पुरुष के लिए सभी शिवलिंगों का नैवेद्य शुभ और महा प्रसाद माना जाता है। ऐसे में उसे प्रसाद अवश्य ग्रहण करना चाहिए। जो व्यक्ति सामने पड़े शिव के प्रसाद को यह कहकर कि मैं इसे बाद में ग्रहण करूंगा या प्रसाद को ग्रहण करने में देर करें वो पाप का भागीदार बन जाता है। शिव पुराण में कहा गया है कि ब्रह्म हत्या करने वाला पुरुष भी अगर पवित्र होकर शिव के प्रसाद को ग्रहण करता है तो उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।
किस शिवलिंग के प्रसाद को नहीं खाना चाहिए ?
शिव पुराण के अनुसार, मिट्टी और पत्थर के बने शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद ग्रहण नहीं करना चाहिए। यह प्रसाद शिव जी के गणों को समर्पित होता है। शिव पुराण के अनुसार, जहां चंड का अधिकार होता है, वहां के प्रसाद को साधारण मनुष्यों को नहीं खाना चाहिए। इसको खाने से कई तरह की परेशानियों का समाना करना पड़ सकता है।
किस शिवलिंग के प्रसाद को ग्रहण कर सकते हैं?
नर्मदा नदी में मिलने वाले पत्थर से बने शिवलिंग का प्रसाद ग्रहण किया जा सकता है। इसके अलावा किसी धातु (चांदी, तांबा या पीतल) से निर्मित शिवलिंग का प्रसाद भी खाया जा सकता है। सिद्धि द्वारा स्थापित किए गए शिवलिंग पर चढ़े प्रसाद को ग्रहण करने में भी कोई दोष नहीं हैं। शिव पुराण में बताया गया है कि भगवान शिव की मूर्तियों या तस्वीर पर भी चंड का अधिकार नहीं होता है। इसलिए उस प्रसाद को भी लिया जा सकता है।
शिवलिंग पर चढ़े प्रसाद का नियम?
शिव पुराण में कहा गया है कि जो मनुष्य शिवलिंग को विधिपूर्वक स्नान कराकर उसे तीन बार आचमन करता है, उसके शरीर, वाणी और मन तीनों प्रकार के पाप शीघ्र नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा शिवलिंग पर चढ़ा जो प्रसाद ग्रहण करने वाला नहीं माना जाता है, वह भी शालिग्राम के स्पर्श मात्र से ग्रहण के योग्य हो जाता है।
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