धर्म-अध्यात्म

धर्म: आज है सावन का आखिरी मंगला गौरी व्रत, साथ में पुत्रदा एकादशी,जानें पूजा विधि

Sarita
5 Aug 2025 6:47 AM IST
धर्म: आज है सावन का आखिरी मंगला गौरी व्रत, साथ में पुत्रदा एकादशी,जानें पूजा विधि
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धर्म: सावन का महीना पूरे वर्ष में सबसे पावन समय माना जाता है, खासकर भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए. इस माह में हर मंगलवार को महिलाएं मंगला गौरी व्रत करती हैं, जो माता पार्वती को समर्पित होता है. यह व्रत मुख्य रूप से विवाहित स्त्रियों द्वारा अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन के लिए किया जाता है. अविवाहित लड़कियां भी यह व्रत करती हैं ताकि उन्हें अच्छा जीवनसाथी मिल सके|
इस बार 5 अगस्त को सावन का चौथा और अंतिम मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा. इस दिन एक और महत्वपूर्ण पर्व भी है – पुत्रदा एकादशी. जब दो शुभ तिथियां एक साथ आती हैं, तो उनका महत्व और भी बढ़ जाता है. इस विशेष दिन का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि यह केवल श्रद्धा का विषय नहीं, बल्कि विश्वास और पारिवारिक सौभाग्य से भी जुड़ा हुआ है|
मंगला गौरी व्रत: पूजन विधि:
-इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल वस्त्र पहनें.
-पूजा के लिए एक लकड़ी का खंभा खड़ा करें और उसके चारों ओर केले के पत्ते बांधें.
-इसके बाद एक कलश स्थापित करें और उस पर मंगला गौरी की मूर्ति रखें.
-मूर्ति सोने, चांदी या पीतल की हो सकती है.
-माता को सुहाग के सामान जैसे चूड़ी, बिंदी, साड़ी और नथ अर्पित करें|
पूजन में 16 दीपक जलाकर आरती करें और “श्री मंगल गौरी नमः” मंत्र का जाप करें. व्रत कथा का श्रवण अवश्य करें. पूजा के बाद 16 विवाहित महिलाओं को आमंत्रित करके उन्हें भोजन कराएं और सुहाग की सामग्री भेंट करें. यह माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा और व्रत करने पर मां पार्वती आशीर्वाद देती हैं|
पुत्रदा एकादशी का महत्व:
पुत्रदा एकादशी विशेष रूप से संतान की कामना रखने वाले दंपतियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. व्रती दिनभर उपवास रखते हैं और रातभर जागरण करते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन उपवास रखने और प्रभु विष्णु का ध्यान करने से संतान प्राप्ति का योग बनता है और संतान सुख में वृद्धि होती है|
शुभ मुहूर्त और खास योग:
इस दिन कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं, जैसे कि ब्रह्म बेला, अभिजीत काल, विजय काल और रवि योग. सुबह 4:20 बजे से शुभ बेला शुरू होती है और दोपहर में अभिजीत काल दोपहर 12:00 बजे से लेकर 12:54 तक रहता है. पूजा-पाठ और व्रत के लिए यह समय सबसे उपयुक्त माना गया है.
आज श्रद्धालुओं के लिए एक अद्वितीय अवसर है जब मंगला गौरी व्रत और पुत्रदा एकादशी एक साथ पड़ रहे हैं. यह दिन सिर्फ धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि परिवार में सुख, शांति और समृद्धि के लिए भी बहुत अहम है. अगर पूरी आस्था और सच्चे मन से व्रत किया जाए तो मनचाहा फल जरूर प्राप्त होता है|
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