धर्म-अध्यात्म

धर्म: जानें सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए रविवार के व्रत के बारे में

Sarita
21 Dec 2025 8:58 AM IST
धर्म: जानें सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए रविवार के व्रत के बारे में
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धर्म: सनातन धर्म में रविवार भगवान सूर्यदेव को समर्पित माना गया है। सूर्यदेव को नवग्रहों का राजा, तेज, आरोग्य, आत्मबल और यश का कारक देवता कहा गया है। विष्णु पुराण और भविष्य पुराण में सूर्य उपासना का विशेष महत्व वर्णित है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीराम ने रावण से युद्ध के समय आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ किया था। इस स्तोत्र के प्रभाव से उन्हें विजय, अपार बल और आत्मविश्वास की प्राप्ति हुई। इसी कारण रविवार को सूर्यदेव की पूजा और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है।
व्रत से मिलने वाले फल:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना गया है, जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर होता है या जो स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों, सरकारी कार्यों में रुकावट या आत्मविश्वास की कमी से जूझ रहे होते हैं। सूर्यदेव की कृपा से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है।
व्रत की विधि:
रविवार व्रत की शुरुआत प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने से होती है। इसके बाद लाल या केसरिया वस्त्र धारण कर तांबे के पात्र में जल, लाल पुष्प, अक्षत और रोली मिलाकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करना चाहिए। अर्घ्य देते समय “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ आदित्याय नमः” मंत्र का जाप करना शुभ माना गया है। इसके पश्चात व्रत का संकल्प लेकर दिनभर सात्त्विक आहार या फलाहार करना चाहिए।
सूर्य कृपा प्राप्त करने के शुभ कर्म:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार को गेहूं, गुड़, तांबा, लाल वस्त्र और लाल पुष्प का दान विशेष पुण्य प्रदान करता है। इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र या गायत्री मंत्र का पाठ करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और आत्मबल में वृद्धि होती है। साथ ही पिता, गुरु और वरिष्ठ जनों का सम्मान करना सूर्यदेव को विशेष रूप से प्रिय माना गया है।
रविवार व्रत में किन बातों से करें परहेज:
रविवार के दिन अहंकार, क्रोध और कठोर वाणी से बचना चाहिए। किसी का अपमान करना, झूठ बोलना या अनावश्यक विवाद करना अशुभ माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मांसाहार, मदिरा सेवन और तामसिक भोजन से दूरी बनाए रखना चाहिए, जिससे सूर्यदेव की कृपा बनी रहती है और व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
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