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धर्म-अध्यात्म
Ravidas Jayanti 2026: आज है रविदास जयंती, जानें इस दिन का महत्व
Sarita
1 Feb 2026 9:58 AM IST

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Ravidas Jayanti 2026: रविदास जयंती 2026 को लेकर देशभर में जोर-शोर से तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में इस अवसर पर विशेष उत्साह देखने को मिलता है, जहां संत रविदास जयंती बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। 15वीं शताब्दी के महान संत, समाज सुधारक और कवि गुरु रविदास जी ने अपना पूरा जीवन समाज में फैली कुरीतियों को मिटाने और समानता का संदेश देने में समर्पित कर दिया। वे हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे रहते थे और मानते थे कि ईश्वर द्वारा बनाए गए सभी लोग, चाहे अमीर हों या गरीब, समान हैं।
संत रविदास जी की जयंती हर वर्ष माघ पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी, रविवार को सुबह 5 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 2 फरवरी, सोमवार को सुबह 3 बजकर 38 मिनट तक रहेगी। ऐसे में संत रविदास जयंती 1 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। इस साल गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती है, जिसे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा।
क्यों मनाते हैं रविदास जयंती?
रविदास जयंती संत गुरु रविदास जी के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है। मान्यता है कि उनका जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में संवत 1337 ईस्वी में माघ महीने की पूर्णिमा के दिन हुआ था। इसी वजह से हर साल माघ पूर्णिमा को उनकी जयंती मनाने की परंपरा चली आ रही है। गुरु रविदास जी ने अपने जीवन और विचारों से समाज को यह सिखाया कि सभी इंसान बराबर हैं और भक्ति का रास्ता प्रेम व करुणा से होकर जाता है।
वाराणसी में रविदास जयंती का खास महत्व है और यहां यह पर्व बहुत ही भव्य तरीके से मनाया जाता है। इस अवसर पर दूर-दूर से श्रद्धालु वाराणसी पहुंचते हैं। गुरु रविदास जी की तस्वीरों के साथ शोभायात्राएं निकाली जाती हैं, मंदिरों में आरती होती है और उनके भजनों व पदों का गायन किया जाता है। यह दिन श्रद्धा, एकता और सामाजिक समरसता का संदेश देता है।
नामु तेरो आरती भजनु मुरारे, हरि के नाम बिनु गणपति सगल पसारे।
नाम तेरा सारनो नाम तेरा उर्सा, नामु तेरा केसरो ले चितकारो।
नाम तेरा अन्भुला नाम तेरा चंदनोघसि, जपे नाम ले तुहि कू चारे।
नाम तेरा दिवा नाम तेरो, नाम तेरो तेल बात ले माही पसारे।
नाम तेरे की ज्योति जगाई, भीलो उजिरो भवन सगलारे।
नाम तेरो तगा नाम फूल माला, भार चौथा सगल जूठारे।
तेरो कियो तू ही किया अरपौ, नाम तेरो तुही चंवर ढोलारे।
दस अथा अट्ठेस चारे खानी, इहै वरतनि है सगल संसारे।
कहै 'रविदास' नाम तेरो आरती, सतिनाम है हरिभोगे।
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