धर्म-अध्यात्म

Ravi Pradosh Vrat 2025: प्रदोष व्रत पर करें देवी पार्वती के इन 108 नामों का जाप, मिलेगी सांसारिक सुख की प्राप्ति

Sarita
8 Jun 2025 12:48 PM IST
Ravi Pradosh Vrat 2025:  प्रदोष व्रत पर करें देवी पार्वती के इन 108 नामों का जाप, मिलेगी सांसारिक सुख की प्राप्ति
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Ravi Pradosh Vrat 2025: आज यानी 8 जून 2025 को रवि प्रदोष का व्रत रखा जा रहा है। यह दिन सभी शिव भक्तों के लिए अत्यंत शुभ है। मान्यता है कि रवि प्रदोष व्रत पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के धन-धान्य में वृद्धि होती है। इसके अलावा सभी दोषों से भी मुक्ति मिलती हैं। यह तिथि सुहागिन महिलाओं के लिए और भी खास है। दरअसल, रवि प्रदोष व्रत रखने पर सांसारिक सुख की प्राप्ति होती है। व्रत के प्रभाव से रिश्तों में चल रही अनबन दूर और पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आज रवि प्रदोष के दिन परिध के साथ-साथ शिव योग का संयोग बना हुआ है। ऐसे में जहां पूजा-अर्चना से महादेव प्रसन्न होते हैं, वहीं देवी पार्वती के 108 नामों का जाप करना भी लाभकारी होता है। इससे सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए इन नामों के बारे में जानते हैं।
।। मां पार्वती के 108 नाम।।
ॐ श्री गौर्यै नमः।
ॐ गणेशजनन्यै नमः।
ॐ गिरिराजतनूद्भवायै नमः।
ॐ गुहाम्बिकायै नमः।
ॐ जगन्मात्रे नमः।
ॐ गंगाधरकुटुंबिन्यै नमः।
ॐ वीरभद्रप्रसुवे नमः।
ॐ विश्वव्यापिन्यै नमः।
ॐ विश्वरूपिण्यै नमः।
ॐ अष्टमूर्त्यात्मिकायै नमः।
ॐ कष्टदारिद्यशमन्यै नमः।
ॐ शिवायै नमः।
ॐ शांभव्यै नमः।
ॐ शंकर्यै नमः।
ॐ बालायै नमः।
ॐ भवान्यै नमः।
ॐ भद्रदायिन्यै नमः।
ॐ माङ्गल्यदायिन्यै नमः।
ॐ सर्वमङ्गलायै नमः।
ॐ मञ्जुभाषिण्यै नमः ।
ॐ महेश्वर्यै नमः ।
ॐ महामायायै नमः।
ॐ मन्त्राराध्यायै नमः।
ॐ महाबलायै नमः।
ॐ हेमाद्रिजायै नमः।
ॐ हैमवत्यै नमः।
ॐ पार्वत्यै नमः।
ॐ पापनाशिन्यै नमः
ॐ नारायणांशजायै नमः।
ॐ नित्यायै नमः।
ॐ निरीशायै नमः।
ॐ निर्मलायै नमः।
ॐ अम्बिकायै नमः।
ॐ मृडान्यै नमः।
ॐ मुनिसंसेव्यायै नमः।
ॐ मानिन्यै नमः।
ॐ मेनकात्मजायै नमः।
ॐ कुमार्यै नमः।
ॐ कन्यकायै नमः।
ॐ दुर्गायै नमः ।
ॐ कलिदोषनिषूदिन्यै नमः ।
ॐ कात्यायिन्यै नमः।
ॐ कृपापूर्णायै नमः।
ॐ कल्याण्यै नमः।
ॐ कमलार्चितायै नमः।
ॐ सत्यै नमः।
ॐ सर्वमय्यै नमः।
ॐ सौभाग्यदायै नमः।
ॐ सरस्वत्यै नमः।
ॐ अमलायै नमः।
ॐ अमरसंसेव्यायै नमः।
ॐ अन्नपूर्णायै नमः।
ॐ अमृतेश्वर्यै नमः।
ॐ अखिलागमसंस्तुतायै नमः।
ॐ सुखसच्चित्सुधारसायै नमः।
ॐ बाल्याराधितभूतेशायै नमः।
ॐ भानुकोटिसमद्युतये नमः।
ॐ हिरण्मय्यै नमः।
ॐ परायै नमः।
ॐ सूक्ष्मायै नमः।
ॐ शीतांशुकृतशेखरायै नमः।
ॐ सर्वकालसुमङ्गल्यै नमः।
ॐ सर्वभोगप्रदायै नमः।
ॐ सामशिखायै नमः।
ॐ वेदन्तलक्षणायै नमः।
ॐ कर्मब्रह्ममय्यै नमः।
ॐ कामकलनायै नमः।
ॐ कांक्षितार्थदायै नमः।
ॐ चन्द्रार्कायितताटङ्कायै नमः।
ॐ चिदंबरशरीरिण्यै नमः।
ॐ श्रीचक्रवासिन्यै नमः।
ॐ देव्यै नमः।
ॐ कामेश्वरपत्यै नमः।
ॐ कमलायै नमः।
ॐ मारारातिप्रियार्धांग्यै नमः।
ॐ मार्कण्डेयवरप्रदायै नमः।
ॐ पुत्रपौत्रवरप्रदायै नमः।
ॐ पुण्यायै नमः।
ॐ पुरुषार्थप्रदायिन्यै नमः।
ॐ सत्यधर्मरतायै नमः।
ॐ सर्वसाक्षिण्यै नमः।
ॐ शतशांगरूपिण्यै नमः।
ॐ श्यामलायै नमः।
ॐ बगलायै नमः।
ॐ चण्ड्यै नमः।
ॐ मातृकायै नमः।
ॐ भगमालिन्यै नमः।
ॐ शूलिन्यै नमः।
ॐ विरजायै नमः।
ॐ स्वाहायै नमः।
ॐ स्वधायै नमः।
ॐ प्रत्यंगिराम्बिकायै नमः।
ॐ आर्यायै नमः।
ॐ दाक्षायिण्यै नमः।
ॐ दीक्षायै नमः।
ॐ सर्ववस्तूत्तमोत्तमायै नमः।
ॐ शिवाभिधानायै नमः।
ॐ श्रीविद्यायै नमः।
ॐ प्रणवार्थस्वरूपिण्यै नमः।
ॐ ह्रींकार्यै नमः ।
ॐ नादरूपायै नमः।
ॐ त्रिपुरायै नमः।
ॐ त्रिगुणायै नमः।
ॐ ईश्वर्यै नमः।
ॐ सुन्दर्यै नमः।
ॐ स्वर्णगौर्यै नमः।
ॐ षोडशाक्षरदेवतायै नमः।
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