धर्म-अध्यात्म

Ram Navami vrat katha: राम नवमी की पूजा के दौरान जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, श्री राम के आशीर्वाद से हर काम में मिलेगी सफलता

Sarita
6 April 2025 7:42 AM IST
Ram Navami vrat katha:  राम नवमी की पूजा के दौरान जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, श्री राम के आशीर्वाद से हर काम में मिलेगी सफलता
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Ram Navami vrat katha: सनातन धर्म में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का बेहद खास महत्व है. पंचाग के अनुसार रामनवमी का पर्व हर साल चैत्र माह शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान राम ने सूर्यवंशी राजा दशरथ के घर में जन्म लिया था, इसी वजह से रामनवमी के दिन भगवान राम की पूजा की जाती है. इस दिन लोग प्रभु श्री राम की पूजा करने के साथ रामचरितमानसा का पाठ करते हैं. वहीं इस व्रत करने वालें लोगों को पूजा में रामनवमी की व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए. इस दिन व्रत कथा पढ़ना और सुनना बहुत ही शुभ फलदायी होता हैं|
रामनवमी व्रत 2025 की कथा हिन्दी में:
पौराणिक कथा अनुसार, भगवान राम, मां सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान जंगल में घूम रहे थे. कुछ देर बाद थकान महसूस करने पर भगवान राम ने थोड़ा विश्राम करने का विचार किया. विश्राम स्थल की तलाश के दौरान उन्हें एक बुढ़िया की कुटिया दिख गई. इस कुटिया में जब राम, सीता और लक्ष्मण पहुंचे तो देखा कि वह सूत कात रही थी. जैसे ही बुढ़िया ने देखा तो आवभगत में लग गई और विश्राम करने को कहा. इसके साथ ही भगवान राम, सीता और लक्ष्मण को भोजन करने का आग्रह किया. इस पर भगवान राम ने बुढ़िया से कहा-माई मेरा हंस भूखा है, पहले इसके लिए दो मोती दे दो. ताकि इसके बाद मैं मैं भी भोजन कर सकूं|
बुढ़िया के लिए काफी मुश्किल वक्त था क्योंकि उसके पास मोती नहीं थे. बुढ़िया दौड़ी-दौड़ी राजा के पास गई और उनसे उधार में मोती मांगे. चूंकि राजा यह जानता था कि बुढ़िया दो मोती वापस लौटाने में सक्षम नहीं है तो पहले इनकार किया. कई बार अनुरोध करने के बाद राजा ने बुढ़िया पर तरस खाकर मोती दे दिए. बुढ़िया ने हंस को मोती खिला दिया, जिसके बाद भगवान राम ने भी भोजन ग्रहण किया. भगवान प्रसन्न होकर बुढ़िया के आंगन में एक मोतियों का पेड़ लगा गए|
एक बार पेड़ से मिले मोती को बुढ़िया समेटकर राजा के पास ले गई. हैरान राजा ने पता किया कि आखिर बुढ़िया के पास इतने मोती कहां से आए. राजा को मालूम हुआ कि बुढ़िया के आंगन में पेड़ है, जिसके बाद राजा ने वह पेड़ ही अपने आंगन में मंगवा लिया. लेकिन राजा के आंगन में आते ही पेड़ पर कांटे उगने लगे. एक दिन उस पेड़ का एक कांटा रानी के पैर में चुभा गया. राजा परेशान होकर दोबारा वह पेड़ बुढ़िया के आंगन में लगवा दिया. प्रभु श्री राम की कृपा से पेड़ में फिर से मोती लगने लगें. अब जब पेड़ से मोती गिरता बुढ़िया उसे उठाकर प्रभु के प्रसाद के रूप में सभी को बांट देती थी|
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