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धर्म-अध्यात्म
Radha Ashtami Vrat: राधा अष्टमी का व्रत रखते समय इन नियमों का करें पालन
Sarita
25 Aug 2025 8:42 AM IST

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Radha Ashtami Vrat: राधा अष्टमी के दिन पूजा और व्रत के कुछ नियम होते हैं, जिनका पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है। अगर पूजा सही तरीके से न की जाए या कुछ गलतियां हो जाएं तो पूजा का फल बाधित हो सकता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि इस पावन अवसर पर क्या करना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए, ताकि भक्तिभाव से की गई पूजा पूर्ण रूप से फलदायी हो सके। इस दिन विशेष रूप से ब्रजभूमि, मथुरा और वृंदावन जैसे तीर्थ स्थानों पर विशेष उत्सव और झांकियों का आयोजन किया जाता है। भक्त व्रत रखते हैं, कीर्तन-भजन करते हैं और राधा रानी की विधिवत पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से जीवन में प्रेम, सद्भाव और सुख-शांति का वास होता है।
राधा अष्टमी के दिन क्या करें:
राधा अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर शुद्ध जल से स्नान करें। स्नान के बाद साफ और स्वच्छ कपड़े पहनें ताकि मन और शरीर दोनों पवित्र रहें। तभी व्रत और पूजा का संकल्प लें।
पूरे दिन ब्रह्मचर्य नियम का पालन करना अनिवार्य माना जाता है। इसका मतलब है कि आप न केवल शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक रूप से भी संयमित और शुद्ध रहें।
इस दिन राधा रानी को केवल ताजी और पवित्र चीज़ें जैसे ताजे फल, दूध, दूध से बने प्रसाद, फूल, इत्यादि ही भोग के रूप में लगाएं। पुरानी या अर्धपकी हुई चीज़ें अर्पित न करें।
पूजा के बाद राधा अष्टमी व्रत की कथा का पाठ या श्रवण करें। इससे व्रत की महिमा और धार्मिकता बढ़ती है और मन को आध्यात्मिक शांति मिलती है।
व्रत खोलने का समय खास होता है। शुभ मुहूर्त में ही व्रत का पारण करना चाहिए ताकि पूजा का फल पूर्ण रूप से प्राप्त हो। जल्दबाजी न करें और समय का सम्मान करें।
व्रत खोलते समय उसी प्रसाद को ग्रहण करें, जिसे पूजा में राधा रानी को भोग लगाया गया था। इससे पूजन की पूर्णता बनी रहती है।
व्रत खोलने से पहले जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, या धन दान करें। इसके अलावा गौ सेवा भी बहुत शुभ मानी जाती है। इससे पुण्य बढ़ता है और व्रत की सफलता सुनिश्चित होती है।
पारण करने के बाद घर के बुजुर्गों या वरिष्ठों का आशीर्वाद लेना आवश्यक होता है। उनका आशीर्वाद आपके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाता है।
राधा अष्टमी व्रत के दिन क्या न करें:
पूजा में जो भी भोग राधा रानी को अर्पित किया जाना है, वह पूरी तरह शुद्ध और बिना किसी स्पर्श के होना चाहिए। भोग बनाने के बाद उसे चखना या किसी भी तरह से झूठा करना वर्जित है।
व्रत के दिन दिन में सोना धार्मिक दृष्टि से अनुचित माना गया है। इससे व्रत की तपस्या में बाधा आती है और इसका फल कम हो सकता है।
इस शुभ दिन शरीर की कटिंग जैसे बाल, नाखून या दाढ़ी काटना वर्जित होता है। इसे अशुद्धता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इससे बचना चाहिए।
इस दिन काले या बहुत गहरे रंग के कपड़े पहनने से परहेज़ करें। राधा रानी को लाल और पीले रंग अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए इन्हीं रंगों के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
पूजा करते समय महिलाओं को बाल बांधकर रखने चाहिए और सिर को चुनरी से ढकना चाहिए। यह श्रद्धा और शुद्धता का प्रतीक होता है। पुरुषों को भी सिर पर रुमाल या कपड़ा रखना चाहिए।
राधा अष्टमी की तिथि के दौरान बाल धोना वर्जित माना जाता है। यदि बाल धोने की आवश्यकता हो तो यह कार्य अष्टमी शुरू होने से पहले कर लेना चाहिए।
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि आरंभ: 30 अगस्त, रात्रि 10:46 बजे से
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि समाप्त: 1 सितंबर, देर रात 12:57 बजे तक
उदयातिथि के अनुसार राधा अष्टमी 31 अगस्त को मनाई जाएगी।
राधा अष्टमी शुभ मुहूर्त :
राधा अष्टमी पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: 31 अगस्त, प्रातः 11:05 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक रहेगा।
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