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धर्म-अध्यात्म
Pradosh Vrat 2026: गुरु प्रदोष व्रत से होगी 2026 की शुरुआत
Sarita
19 Dec 2025 9:46 AM IST

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Pradosh Vrat 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आने वाला नया साल 2026 बेहद शुभ संकेतों के साथ शुरू होने जा रहा है। दरअसल, वर्ष के पहले ही दिन एक विशेष व्रत और शुभ वार का दुर्लभ संयोग बन रहा है। 1 जनवरी 2026, गुरुवार के दिन पड़ रहा है और इसी दिन गुरु प्रदोष व्रत भी रखा जाएगा। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, जबकि गुरुवार का दिन भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष फलदायी होता है। ऐसे में नए साल की शुरुआत महादेव और नारायण की कृपा से होना अत्यंत मंगलकारी माना जा रहा है।
महादेव और नारायण की उपासना का शुभ योग:
पंचांग के अनुसार 1 जनवरी 2026 को पौष मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि रहेगी। त्रयोदशी भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष मानी जाती है और जब यह तिथि गुरुवार के दिन आती है, तो इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस व्रत का संबंध गुरु ग्रह यानी बृहस्पति से जोड़ा जाता है, जो ज्ञान, धर्म, समृद्धि और सौभाग्य का कारक माना जाता है। गुरु प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और कई प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ संयोग में की गई पूजा से भक्तों को सुख-समृद्धि, मानसिक शांति, रोगों से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। माना जाता है कि गुरु प्रदोष व्रत करने से गुरु ग्रह मजबूत होता है, जिससे व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, सम्मान और आर्थिक स्थिरता बढ़ती है। नए साल के पहले ही दिन यह व्रत पड़ना इसे और भी खास बना देता है।
पूजा का शुभ समय और विधि:
1 जनवरी 2026, गुरुवार के दिन सुबह के समय भगवान विष्णु की पूजा करके नए वर्ष की शुरुआत करना उत्तम रहेगा। इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है, क्योंकि पीला रंग गुरु ग्रह और भगवान विष्णु दोनों को प्रिय है। पूजा में पीले फूल, चने की दाल, केले या पीले रंग की मिठाई का भोग अर्पित किया जा सकता है। इसके साथ ही ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
नए साल पर शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करें। प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद तक माना जाता है। इस दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, भांग और फल अर्पित करें। ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें और अंत में भगवान शिव की आरती करें। ऐसा माना जाता है कि इस विधि से की गई पूजा नए साल में सुख, शांति और सफलता दिलाती है।
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