धर्म-अध्यात्म

Pitru Paksha: कैसे करें पितरों को जल अर्पित, जानें पूरी विधि

Sarita
5 Sept 2025 9:46 AM IST
Pitru Paksha: कैसे करें पितरों को जल अर्पित, जानें पूरी विधि
x
Pitru Paksha: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष एक पवित्र समय होता है जब हम अपने पूर्वजों के प्रति अपनी श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करते हैं। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे उस रिश्ते को निभाने का अवसर है जो हमारे अस्तित्व की जड़ से जुड़ा है। हर साल भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से अमावस्या तक का यह पंद्रह दिन का कालखंड श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और जलार्पण जैसे कर्मों के माध्यम से पितरों को याद करने और उन्हें तृप्त करने के लिए समर्पित होता है।
इस वर्ष पितृ पक्ष 7 सितंबर 2025 से शुरू हो रहा है और खास बात यह है कि इस दिन पूर्ण चंद्रग्रहण भी है। ऐसे में इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष में विधिपूर्वक जल तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, वे प्रसन्न होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं और जीवन की कई बाधाओं को दूर करते हैं। यही कारण है कि पूरे पितृ पक्ष में जल तर्पण करना अत्यंत पुण्य और फलदायी माना गया है।
स्नान और शुद्ध वस्त्र पहनना:
पितृ पक्ष के दौरान पितरों को जल अर्पित करने से पहले स्वयं का स्नान करना आवश्यक होता है। स्नान करने से शरीर और मन दोनों शुद्ध हो जाते हैं। इसके बाद स्वच्छ और साफ़ वस्त्र पहनकर ही जल अर्पित करने का कार्य करना चाहिए। यह पूरी प्रक्रिया श्रद्धा और भक्ति के साथ करनी चाहिए ताकि पितरों को उचित सम्मान मिल सके।
सूर्य की दिशा में मुख करके जल अर्पित करना:
जल अर्पित करते समय अपने चेहरे को पूर्व या उगते सूर्य की दिशा की ओर करना शुभ माना जाता है। जल अर्पित करने से पहले दोनों हाथों में तांबे का लोटा पकड़ें और उसे सिर के ऊपर उठाएं। इसके बाद मंत्र जाप करते हुए धीरे-धीरे जल को सूर्य की दिशा में प्रवाहित करें। ऐसा करने से पितरों को अधिक सुख और संतुष्टि मिलती है।
तांबे के लोटे का प्रयोग:
पितरों को जल अर्पित करने के लिए तांबे का लोटा सबसे उपयुक्त माना गया है। तांबे का लोटा शुद्ध और पवित्र माना जाता है, जो जल को ऊर्जा और सकारात्मकता से भर देता है। जल अर्पित करने के लिए ऐसी जगह चुनें जो शांत और एकांत हो, ताकि विधि-विधान पूरी श्रद्धा से पूरी हो सके। ऐसी जगह हो जहाँ परिवार के लोग बार-बार ना आते-जाते हों।
जल अर्पित करते समय मंत्र जाप अत्यंत आवश्यक होता है। इस प्रक्रिया में “ॐ पितृभ्यो नम:” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इस मंत्र के उच्चारण से पितृ दोष दूर होता है और पितरों को आशीर्वाद प्राप्त होता है। मंत्र के साथ जल अर्पण करने से कर्मों का प्रभाव और भी अधिक मजबूत होता है।
काले तिल और धूप का महत्व:
पितरों को जल अर्पित करने वाले जल में काले तिल डालना चाहिए। काले तिल पितृ संबंधी अनुकूलता का प्रतीक होते हैं और यह जल को पवित्रता प्रदान करते हैं। जल में काले तिल डालकर उसे तांबे के लोटे में लेकर सिर के ऊपर उठाएं और मंत्र जाप के साथ जल अर्पित करें। इस दौरान धूप और दिया जलाना भी आवश्यक होता है क्योंकि इससे पितरों की नाराजगी दूर होती है और वातावरण पवित्र बनता है।
Next Story