धर्म-अध्यात्म

Onam 2025: खुशियों और समृद्धि का पर्व क्यों माना जाता है ओणम ,जानें इससे जुड़ी परंपराएं

Sarita
3 Sept 2025 9:44 AM IST
Onam 2025: खुशियों और समृद्धि का पर्व क्यों माना जाता है ओणम ,जानें इससे जुड़ी परंपराएं
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Onam 2025: भारत विविधताओं का देश है और हर क्षेत्र में अलग-अलग त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं। दक्षिण भारत का सबसे बड़ा और खास त्योहार ओणम है, जो खास तौर पर केरल राज्य में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार 10 दिनों तक चलता है और इस साल इसकी शुरुआत 26 अगस्त 2025 से हो रही है। इसका समापन 5 सितंबर 2025 को होगा, जिसे थिरुवोणम कहा जाता है।
ओणम का मुख्य त्योहार इसी दिन मनाया जाएगा:
ओणम त्योहार मलयालम कैलेंडर के चिंगम महीने में मनाया जाता है। यह त्योहार 10 दिनों तक चलता है, जिसमें हर दिन का अपना विशेष महत्व होता है। इस साल ओणम की शुरुआत 'अथम' से हुई और इसका मुख्य त्योहार यानी 'थिरुवोणम' शुक्रवार, 5 सितंबर 2025 को मनाया जाएगा। यह दिन त्योहार का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है, जब लोग महाबली के स्वागत में तरह-तरह के व्यंजन बनाते हैं और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेते हैं।
ओणम इतना खास क्यों है:
राजा महाबली का पुनः आगमन: ओणम का मुख्य महत्व पौराणिक कथाओं से जुड़ा है। यह त्यौहार दैत्यराज महाबली के अपनी प्रजा से मिलने पृथ्वी पर लौटने का प्रतीक है। मान्यता है कि महाबली एक अत्यंत न्यायप्रिय और उदार राजा थे, जिनके शासनकाल में केरल में सुख-समृद्धि थी। लेकिन उनकी बढ़ती लोकप्रियता के कारण देवराज इंद्र असुरक्षित महसूस करने लगे। तब भगवान विष्णु ने वामन (बौने ब्राह्मण) का रूप धारण किया और राजा महाबली से तीन पग भूमि दान में मांगी।
महाबली ने सहर्ष यह दान दे दिया। पहले पग में वामन ने पूरी पृथ्वी और दूसरे पग में पूरा आकाश नाप लिया। जब तीसरे पग के लिए कोई स्थान नहीं बचा, तो राजा महाबली ने अपना सिर आगे कर दिया। राजा की उदारता और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक भेज दिया, लेकिन साथ ही यह वरदान भी दिया कि वे वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने पृथ्वी पर आ सकते हैं। यही कारण है कि ओणम के दिन केरल की जनता अपने राजा के स्वागत की तैयारियों में जुट जाती है।
ओणम से जुड़ी परंपराएँ और रीति-रिवाज:
पूकलम: ओणम के दस दिनों तक घरों के आँगन में ताज़े फूलों से सुंदर रंगोली बनाई जाती है। हर दिन इसमें एक नई परत डाली जाती है, जिससे यह बड़ी और अधिक आकर्षक हो जाती है। यह राजा महाबली के स्वागत का प्रतीक है।
ओणम सद्या: ओणम का सबसे बड़ा आकर्षण 'ओणम सद्या' है, जो 26 से ज़्यादा व्यंजनों का एक भव्य शाकाहारी भोज है। ये व्यंजन केले के पत्तों पर परोसे जाते हैं और इनमें विभिन्न प्रकार की सब्ज़ियाँ, दालें, अचार और मिठाइयाँ शामिल होती हैं।
वल्लम काली: केरल की प्रसिद्ध नौका दौड़ 'वल्लमकली' भी ओणम उत्सव का एक हिस्सा है। इस दौड़ को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं।
पुलिकली: इसे 'बाघ नृत्य' भी कहा जाता है। इस दौरान लोग अपने शरीर को बाघों की तरह रंगकर नृत्य करते हैं। यह उत्सव की जीवंतता और ऊर्जा को दर्शाता है।
अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम: ओणम के दौरान काकोटिकल और कथकली जैसे पारंपरिक लोक नृत्य भी आयोजित किए जाते हैं। लोग नए कपड़े पहनते हैं और एक-दूसरे को उपहार देकर अपनी खुशी का इज़हार करते हैं।
फसल उत्सव: ओणम एक फसल उत्सव भी है। यह केरल में धान की नई फसल की कटाई के मौसम की शुरुआत का जश्न मनाता है। यह प्रकृति और किसानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का त्योहार है।
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