धर्म-अध्यात्म

Onam 2025: क्यों मनाया जाता है ओणम, जानें इस त्योहार की विशेषता और धार्मिक महत्व

Sarita
5 Sept 2025 7:37 AM IST
Onam 2025:  क्यों मनाया जाता है ओणम, जानें इस त्योहार की विशेषता और धार्मिक महत्व
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Onam 2025: ओणम पर्व भगवान विष्णु के वामन अवतार को समर्पित है। यह पर्व दक्षिण भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व पर भगवान विष्णु के पाँचवें अवतार वामन देव की पूजा की जाती है। यह पर्व महान सम्राट और राजा महाबली के पृथ्वी पर आगमन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। ओणम पर्व दैत्यराज महाबली की पाताल लोक से पृथ्वी पर वार्षिक यात्रा को समर्पित है।
ओणम पर्व के बारे में मान्यता है कि थिरुवोणम (ओणम) के दिन दैत्यराज महाबली प्रत्येक मलयाली घराने में जाकर अपनी प्रजा से मिलते हैं। वर्ष 2025 में ओणम पर्व शुक्रवार, 5 सितंबर 2025 को मनाया जाएगा। यह पर्व चिंगम माह में भगवान वामन और राजा बलि की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
यह पर्व हर साल मनाया जाता है और 10 दिनों तक चलता है। इस पर्व की शुरुआत केरल के थ्रिक्काकरा स्थित एकमात्र वामन मंदिर से होती है। ओणम, जिसे मलयालम में थिरुवोनम के नाम से भी जाना जाता है, वर्ष 2025 में 26 अगस्त से 5 सितंबर तक मनाया जाएगा। दक्षिण भारत में ओणम उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है।
ओणम उत्सव क्यों मनाया जाता है?
ओणम विशेष रूप से खेतों में अच्छी फसल की पैदावार के लिए मनाया जाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने स्वर्ग लोक पर भगवान इंद्र का अधिकार पुनः स्थापित करने के लिए वामन अवतार लिया था। त्रेता युग में, दैत्य राजा बलि ने अपनी तपस्या और शक्ति के बल पर तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। देवता उसकी शक्ति से परेशान थे। देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता मांगी।
भगवान विष्णु ने एक बौने ब्राह्मण (वामन) का रूप धारण किया और राजा बलि के पास उनके यज्ञ स्थल पर पहुँचे। बलि उस समय एक विशाल यज्ञ कर रहे थे और उन्होंने किसी की इच्छा पूरी करने का वचन दिया था।
वामन रूप में भगवान विष्णु ने बलि से तीन पग भूमि माँगी। वामन रूप में भगवान विष्णु ने अपने पहले पग में संपूर्ण पृथ्वी, दूसरे पग में स्वर्ग लोक नाप लिया और जब तीसरे पग के लिए कोई स्थान नहीं बचा, तो बलि ने भक्तिभाव से अपना सिर झुका लिया। भगवान विष्णु ने तीसरा पग बलि के सिर पर रखकर उसे पाताल लोक भेज दिया और पाताल का अधिपति बना दिया। बलि की भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान ने उसे पाताल का अधिपति बना दिया।
यह पर्व हर साल इसी दिन मनाया जाता है। महाबली की उदारता और उनके समर्पण को देखकर भगवान श्री विष्णु ने राजा बलि की वर्ष में एक बार अपनी भूमि और प्रजा में आने की एकमात्र इच्छा पूरी की। इसलिए, ऐसा माना जाता है कि महाबली के घर वापसी को हर साल केरल में ओणम के रूप में मनाया जाता है।
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