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मोबाइल सर्विस ठप हो जाएगी भारत में? गूगल के टच में अमेरिका, खान सर का दावा

Nilmani Pal
5 Sept 2025 7:04 AM IST
मोबाइल सर्विस ठप हो जाएगी भारत में? गूगल के टच में अमेरिका, खान सर का दावा
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दिल्ली। क्या Gmail के बंद होने से मोबाइल सर्विसेस बंद हो जाएंगी? ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. ये वीडियो खान सर का है, जिसमें वो बता रहे हैं कि अमेरिका से रिश्ते खराब होने पर भारत को कैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. इस वीडियो में खान सर ने दावा किया है कि अमेरिका, गूगल से बोलकर भारत में जीमेल को बंद करवा सकता है. इससे भारत में मोबाइल सर्विसेस ठप हो जाएंगी और तमाम डिजिटल सर्विसेस को इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे.

वीडियो में जो दावा किया जा रहा है वो भ्रामक है. गूगल अगर Gmail सर्विसेस को बंद कर देगा, तो भी आप पूरी तरह से डिजिटल वर्ल्ड से कट नहीं जाएंगे. जीमेल के बंद होने पर आप सिर्फ गूगल की मेल सर्विस इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. तमाम दूसरी सर्विसेस बिना किसी दिक्कत के काम करती रहेंगी.रही बात गूगल सर्विसेस की, तो हां, एक बार को इसकी वजह से दिक्कत हो सकती है. अगर गूगल भारत में अपनी तमाम सर्विसेस को बंद कर दे, तो जरूर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा. हालांकि, खान सर ने अपने वीडियो में कहा है कि प्ले स्टोर के नहीं रहने पर भी यूजर्स UPI सर्विसेस और BHIM जैसे ऐप्स को भी एक्सेस नहीं कर पाएंगे.

दरअसल, ये ऐप्स आपको थर्ड पार्टी स्टोर्स पर भी मिलते हैं. चूंकि, एंड्रॉयड गूगल के इकोसिस्टम का हिस्सा है, तो प्ले स्टोर को कंपनियां प्रमुखता से दिखाती हैं. तमाम चीनी ब्रांड के फोन्स में आपको थर्ड पार्टी स्टोर मिल जाएगा, जिससे आप जरूरी ऐप्स को डाउनलोड कर सकते हैं. वहीं Phone Pe का Indus App Store भी है. ये स्टोर अभी बिटा वर्जन में है, लेकिन आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं.चीन का ही उदाहरण लें, तो वहां गूगल की सर्विसेस नहीं मिलती हैं. फिर भी चीन में लोग इंटरनेट से लेकर टेलीकॉम तक तमाम सेवाओं को इस्तेमाल करते हैं. इसकी वजह वहां मौजूद दूसरे विकल्प हैं. अगर गूगल भारत में पूरी तरह से अपनी सर्विसेस बंद कर देगा (जो आसान नहीं होगा), तो भी आपको इसका विकल्प मिल जाएगा. वहीं डेटा को लेकर खान सर ने दावा किया कि अमेरिका भारतीयों के सभी डेटा को एक्सेस कर रहा है. इस दावे की हकीकत ये है कि भारत सरकार डेटा लोकलाइजेशन पर काम कर रही है. यानी भारतीयों के डेटा को भारत में ही स्टोर किया जाएगा. डेटा लोकलाइजेशन पर भारत सरकार का खासा जोर है.

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