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धर्म-अध्यात्म
Mithun Sankranti 2025: मिथुन संक्रांति पर जानें सूर्य उपासना, स्नान और दान का महत्व
Sarita
15 Jun 2025 8:42 AM IST

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Mithun Sankranti 2025: यह संक्रांति ज्येष्ठ और आषाढ़ मास की संधि पर आती है और सामान्यतः हर वर्ष 14 या 15 जून को मनाई जाती है। इस बार 15 जून 2025 को मिथुन संक्रांति का महा पुण्य काल लगभग 2 घंटे 20 मिनट का रहेगा। यह शुभ समय सुबह 6:53 बजे शुरू होकर सुबह 9:12 बजे समाप्त होगा। इस दौरान स्नान और दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन सूर्य का रश्मियों में विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा होती है और यह दिन धर्म-कर्म, दान, स्नान, सूर्योपासना और व्रत आदि के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है।
तिषीय महत्व:
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा, पिता, आत्मबल, तेज, यश और उच्च ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। जब सूर्य मिथुन राशि में प्रवेश करता है, तो यह एक परिवर्तनकाल होता है जो न केवल ऋतु परिवर्तन दर्शाता है, बल्कि ग्रहों की चाल से भी जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में असर डालता है। मिथुन राशि बुद्धि, संवाद और गति की प्रतीक मानी जाती है। अतः मिथुन संक्रांति के बाद सूर्य की स्थिति व्यक्ति की मानसिक ऊर्जा, विचारों की स्पष्टता और कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। यह समय विशेषकर विद्यार्थियों, वक्ताओं, लेखकों, शिक्षकों और संचार से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत फलदायी होता है।
धार्मिक महत्व:
इस दिन गंगा स्नान, सूर्य अर्घ्य, व्रत और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। पुराणों के अनुसार, मिथुन संक्रांति पर सूर्यदेव की उपासना से रोग, शोक, दुर्भाग्य और दोषों का नाश होता है। इस दिन व्रत रखने और विशेष रूप से प्रातःकाल सूर्योदय के समय जल में लाल पुष्प, लाल चंदन, अक्षत आदि डालकर सूर्य को अर्घ्य देने से जीवन में तेज, ओज और आत्मविश्वास बढ़ता है।
गेहूं और गुड़- सूर्यदेव को अति प्रिय माने जाते हैं गेहूं और गुड़। इनका दान करने से आरोग्य, ऊर्जा और आत्मबल की प्राप्ति होती है।
तांबे का पात्र- तांबा सूर्य का धातु है। तांबे के लोटे या कटोरी का दान करने से सूर्य से संबंधित दोष दूर होते हैं और मान-सम्मान बढ़ता है।
लाल वस्त्र- लाल रंग सूर्य का प्रतीक होता है। ब्राह्मण या जरूरतमंद को लाल वस्त्र देने से सौभाग्य और यश की प्राप्ति होती है।
जल से भरा घड़ा- गर्मी में प्यासे प्राणियों के लिए जल दान सर्वोत्तम माना गया है। इस दिन जल कलश दान करने से पुण्य की प्राप्ति और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
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