धर्म-अध्यात्म

Masik Shivratri: मासिक शिवरात्रि के दिन इस विधि से करें पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, व्रत पारण विधि

Sarita
16 Jan 2026 6:33 AM IST
Masik Shivratri: मासिक शिवरात्रि के दिन इस विधि से करें पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, व्रत पारण विधि
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Masik Shivratri: हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व माना गया है। यह तिथि भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार माघ माह की मासिक शिवरात्रि इस बार 16 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन निशा काल में विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। खास बात यह है कि इस बार माघ शिवरात्रि पर कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ गया है।
मासिक शिवरात्रि शुभ संयोग:
पंचांग के अनुसार, 16 जनवरी को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत होगी, जो 18 जनवरी की रात 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगी। इस दिन निशा काल में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा का विशेष विधान है। निशा काल में पूजा समय रात 11 बजकर 42 मिनट से 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। इस दिन ध्रुव योग और भद्रावास जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन मंगलकारी योगों में शिव-पार्वती की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि:
पूजा विधि की बात करें तो मासिक शिवरात्रि के दिन भक्तों को सूर्योदय से पहले उठकर भगवान शिव और मां पार्वती को प्रणाम करना चाहिए। इसके बाद घर की साफ-सफाई कर गंगाजल मिले जल से स्नान करें। आचमन के बाद सफेद रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्य देव को जल अर्पित करें। फिर पंचोपचार विधि से भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करें। शिवलिंग पर फल, फूल और मिष्ठान अर्पित करें तथा शिव चालीसा का पाठ और शिव मंत्रों का जप करें। अंत में शिव आरती कर भगवान शिव से सुख, सौभाग्य और समृद्धि की कामना करें। मान्यता है कि इस विधि से की गई पूजा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
शिवरात्रि पूजा विधि और व्रत पारण:
मासिक शिवरात्रि का पूजा विधान एक दिन पहले से शुरू हो जाता है। त्रयोदशी के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा आराधना करें और मासिक शिवरात्रि व्रत का संकल्प लें। चतुर्दशी के दिन निराहार रहकर व्रत करें और भगवान शिव पर पवित्र नदी का जल चढ़ाएं। फिर पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें और शिवपंचाक्षर मंत्र ओम नमः शिवाय का जाप करें। इसके बाद रात्रि के चारों पहर में शिव की पूजा करें और अगले दिन सुबह जरूरतमंद लोगों को भोजन या दान दक्षिण देकर अपने व्रत का पारण करें।
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