धर्म-अध्यात्म

Mahashivratri 2025: भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की पौराणिक कथा

Sarita
26 Feb 2025 6:22 AM IST
Mahashivratri 2025:  भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की पौराणिक कथा
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Mahashivratri 2025:भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की कथा न केवल उनके दिव्य प्रेम की कथा है, बल्कि उनकी सच्ची भक्ति और तपस्या की भी कथा है। जिसे पढ़कर यह कहा जा सकता है कि किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है। माता पार्वती जिन्हें उमा के नाम से भी जाना जाता है, हिमालय राज की पुत्री थीं। अपने पिछले जन्म में उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने का संकल्प लिया था।
इस जन्म में भी उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या इतनी कठिन थी कि देवता भी हैरान रह गए।
भगवान शिव की परीक्षा:
अपनी तपस्या में लीन भगवान शिव माता पार्वती की भक्ति और दृढ़ संकल्प को देखकर प्रसन्न हुए। उन्होंने ब्राह्मण का रूप धारण करके माता पार्वती की परीक्षा लेने का निर्णय लिया। ब्राह्मण ने माता पार्वती से कहा कि भगवान शिव एक जोगी हैं, उनके पास कुछ भी नहीं है, और उनसे विवाह करना उचित नहीं है।
माता पार्वती ने ब्राह्मण की बातें सुनीं, लेकिन अपना संकल्प नहीं बदला। उन्होंने कहा कि वह भगवान शिव से ही विवाह करेंगी। उनकी दृढ़ता देखकर भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए और अपने वास्तविक रूप में प्रकट हुए।
भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह की तैयारी शुरू हो गई। देवताओं ने मिलकर विवाह की सारी व्यवस्था की। हिमालय राज ने अपनी पुत्री का विवाह भगवान शिव से करने का प्रस्ताव रखा, जिसे भगवान शिव ने स्वीकार कर लिया। पौराणिक कथाओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह समारोह आयोजित किया गया था। यह एक दिव्य और भव्य समारोह था जिसमें सभी देवता, गंधर्व, किन्नर और ऋषिगण उपस्थित थे। भगवान शिव ने बैल पर सवार होकर बारात निकाली, जिसमें भूत-प्रेत और गण भी शामिल थे।
विवाह के बाद भगवान शिव और देवी पार्वती कैलाश पर्वत पर रहने लगे। उनका वैवाहिक जीवन प्रेम और सुख से भरा था। उन्होंने मिलकर जगत का कल्याण किया और अपनी लीलाओं से भक्तों को प्रेरित किया।
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