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धर्म-अध्यात्म
चंद्रग्रहण: उज्जैन के महाकालेश्वर समेत इन मंदिरों में बदलेगा पूजा और आरती का समय
Sarita
4 Sept 2025 9:32 AM IST

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चंद्र ग्रहण: अगर आप रविवार, 7 सितंबर को धार्मिक नगरी उज्जैन में कोई पूजा-पाठ या भगवान के दर्शन करने आ रहे हैं, तो यह खबर आपके काम की है। दरअसल, इस दिन साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने वाला है और इस मौके पर उज्जैन के कई मंदिरों में दर्शन और पूजा के समय में काफी बदलाव देखने को मिलेंगे। चंद्र ग्रहण को देखते हुए उज्जैन के महाकालेश्वर, कालभैरव, मंगलनाथ, सांदीपनि आश्रम, गोपाल मंदिरों में पूजा और आरती के समय में बदलाव किया जाएगा। ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि इन मंदिरों के समय में क्या बदलाव किए जाएंगे।
महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन में बदलाव:
भारतीय समय के अनुसार, सितंबर में लगने जा रहा चंद्र ग्रहण रविवार, 7 सितंबर को रात 9:58 बजे से शुरू होगा। ऐसे में अगर विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर की बात करें, तो इस मंदिर में प्रतिदिन होने वाली शयन आरती का समय घटाकर रात 9:15 बजे कर दिया गया है। ग्रहण शुरू होने से पहले रात 9:45 बजे तक यह आरती समाप्त हो जाएगी और मंदिर के पट बंद कर दिए जाएँगे। इसके बाद सोमवार सुबह भस्म आरती से पहले मंदिर का शुद्धिकरण किया जाएगा, जिसके बाद बाबा महाकाल को भस्म अर्पित करने से पहले पंचामृत अभिषेक से पूजा-अर्चना की जाएगी।
दोपहर 12:58 बजे से शुरू होगा ग्रहण सूतक:
चंद्र ग्रहण का सूतक 7 सितंबर को दोपहर 12:58 बजे से शुरू हो जाएगा। सूतक काल में भगवान की पूजा-अर्चना और उनकी मूर्ति को स्पर्श करना वर्जित माना गया है। यही वजह है कि सूतक काल शुरू होने से पहले ही मंदिरों में भगवान की पूजा-अर्चना कर ली जाएगी। सूतक काल के दौरान मंदिरों के गर्भगृह में सभी का प्रवेश वर्जित रहेगा।
उज्जैन के प्रसिद्ध श्री गोपाल मंदिर की बात करें तो सूतक काल शुरू होने से पहले पूजा-अर्चना और आरती के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाएँगे। इस दौरान श्रद्धालु मंदिर तो आ सकेंगे, लेकिन उन्हें भगवान के दर्शन से वंचित रहना पड़ेगा। वहीं, गुरु सांदीपनि आश्रम, कालभैरव सहित अन्य वैष्णव मंदिरों में सूतक काल से पहले ही भगवान का पूजन-अर्चन हो जाएगा। शहर के प्रसिद्ध हरसिद्धि मंदिर में सूतक काल से पहले ही देवी का पूजन-अर्चन हो जाएगा और उसके बाद गर्भगृह के पट बंद कर दिए जाएंगे। सोमवार को भगवान के स्नान और पूजन के बाद देवी को नए वस्त्र धारण कराए जाएंगे और फिर श्रृंगार के बाद आरती की जाएगी।
ग्रहण का असर, सुबह 11 बजे तक होगी भात पूजा:
भगवान मंगल की उत्पत्ति स्थली मंगलनाथ में चंद्रग्रहण का असर साफ तौर पर दिखाई देगा। चंद्रग्रहण का सूतक शुरू होने से पहले रविवार, 7 सितंबर को सुबह 11 बजे तक ही भात-पूजन किया जा सकेगा। इसके बाद गर्भगृह में सभी का प्रवेश बंद कर दिया जाएगा। मंगलनाथ मंदिर प्रशासक के के पाठक ने बताया कि ग्रहण काल के दौरान गर्भगृह में श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
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