- Home
- /
- अन्य खबरें
- /
- धर्म-अध्यात्म
- /
- Janmashtami Deepdaan...
धर्म-अध्यात्म
Janmashtami Deepdaan 2025: द्वारका में जन्माष्टमी का चमत्कार , जब समुद्र ने श्रीकृष्ण को किया नमन
Sarita
15 Aug 2025 12:34 PM IST

x
Janmashtami Deepdaan 2025: कहते हैं कि भगवान कृष्ण के जीवन में जितनी कहानियाँ थीं, उतनी ही कहानियाँ आज भी द्वारका की गलियों में जीवित हैं। गुजरात की पावन नगरी द्वारका में जन्माष्टमी का पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और अद्भुत विश्वास का प्रतीक है। यहाँ एक ऐसा किस्सा है जिसे सुनकर आज भी लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। कहा जाता है कि कई साल पहले, जन्माष्टमी की रात, जब मंदिर में भगवान का जन्मोत्सव चल रहा था, समुद्र का रूप भयावह हो गया। लहरें इतनी तेज़ थीं कि लोगों को अपनी जान बचाने के लिए मंदिरों में शरण लेनी पड़ी, लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने इस घटना को इतिहास का हिस्सा बना दिया। आइए ज्योतिषी रवि पाराशर से जानते हैं।
चमत्कार की शुरुआत:
उस रात द्वारका में आसमान में अंधेरा छा गया था, हवाएँ तेज़ चल रही थीं और समुद्र की लहरें उफान मार रही थीं। लोग सोच रहे थे कि शायद यह रात शहर के लिए आखिरी साबित होगी। ठीक आधी रात को द्वारकाधीश मंदिर में भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का शंखनाद हुआ। फिर, मानो किसी अदृश्य शक्ति के आदेश से, समुद्र की लहरें शांत होकर पीछे हट गईं।
लोगों की आस्था और विश्वास:
इस दृश्य को देखने वाले लोगों को समझ आ गया कि यह ईश्वर का चमत्कार है। जहाँ कुछ क्षण पहले विनाश का भय था, वहाँ अब शांति और भक्ति का वातावरण था। उस रात के बाद से, द्वारकावासियों ने यह निश्चय किया कि वे हर जन्माष्टमी पर समुद्र तट पर दीपदान करेंगे, ताकि इस चमत्कार की स्मृति हमेशा जीवित रहे।
दीपदान की परंपरा:
जन्माष्टमी की रात, हजारों भक्त समुद्र तट पर एकत्रित होते हैं। छोटे-छोटे दीये जलाकर समुद्र की लहरों में छोड़ दिए जाते हैं। दूर तैरते ये दीये ऐसा दृश्य उत्पन्न करते हैं मानो तारे समुद्र की गोद में उतर आए हों। यह न केवल ईश्वर को धन्यवाद देने का एक तरीका है, बल्कि एक वादा भी है - कि आस्था और विश्वास से बड़ा कोई तूफ़ान नहीं है।
दीपदान की परंपरा
जन्माष्टमी की रात, हज़ारों श्रद्धालु समुद्र तट पर एकत्रित होते हैं। छोटे-छोटे दीये जलाकर समुद्र की लहरों में छोड़ दिए जाते हैं। दूर तैरते ये दीये ऐसा दृश्य रचते हैं मानो तारे सागर की गोद में उतर आए हों। यह न केवल ईश्वर को धन्यवाद देने का एक तरीका है, बल्कि एक वादा भी है कि आस्था और विश्वास से बड़ा कोई तूफ़ान नहीं है।
TagsJanmashtami Deepdaanद्वारकाजन्माष्टमीचमत्कारJanmashtami DeepdaanDwarkaJanmashtamiMiracle जनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





