धर्म-अध्यात्म

Janmashtami 2025: जानें जन्माष्टमी पर खीरा काटने की परंपरा इसका महत्व

Sarita
10 Aug 2025 6:32 AM IST
Janmashtami 2025: जानें  जन्माष्टमी पर खीरा काटने की  परंपरा इसका महत्व
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Janmashtami 2025: हिंदू धर्म में जन्माष्टमी का त्योहार भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो कि इस साल 16 अगस्त को है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. जन्माष्टमी के दिन हर घर और मंदिर में रोहिणी नक्षत्र के मध्य रात्रि में कान्हा जी की विधिपूर्वक पूजा की जाती है और उन्हें 56 भोग लगाए जाते हैं. इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा में खीरा बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. जन्माष्टमी पर मध्य रात्रि में खीरा काटा जाता है. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा क्यों है. चलिए आपको बताते हैं इसका कारण|
न्माष्टमी पर खीरे का महत्व:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खीरे का संबंध गर्भाश्य से होता है. जन्माष्टमी पर खीरा माता यशोदा के गर्भाश्य का प्रतीक माना जाता है यानी इस दिन खीरा काटना भगवान कृष्ण के जन्म का प्रतीक है. आधी रात को, जब भगवान कृष्ण का जन्म होता है, तो खीरा काटकर, उसके बीज निकालकर, उसे नाभि छेदन (नाल काटना) की प्रतीकात्मक क्रिया के रूप में मनाया जाता है|
जन्माष्टमी पर खीरा क्यों काटा जाता है?
हिंदू धर्म में खीरे का डंठल गर्भनाल का प्रतीक माना जाता है और इसे काटकर भगवान कृष्ण को माता देवकी के गर्भ से अलग करने की रस्म निभाई जाती है. इस रस्म के पीछे मान्यता है कि जिस तरह जन्म के समय बच्चे को मां से अलग करने के लिए गर्भनाल को काटा जाता है, ठीक उसी तरह खीरे को काटकर भगवान कृष्ण का जन्मदिवस मनाया जाता है|
ऐसा माना जाता है कि खीरा शुद्ध और पवित्र फल है और इसे भगवान कृष्ण को अर्पित भी किया जाता है. इसके अलावा, कुछ लोग खीरे को गर्भवती महिलाओं के लिए शुभ मानते हैं. कहते हैं कि जन्माष्टमी पर खीरा प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है|
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