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धर्म-अध्यात्म
Hartalika Teej 2025: त्योहारों पर महिलाएं क्यों लगाती हैं मेहंदी, जानें धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व
Sarita
26 Aug 2025 8:25 AM IST

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Hartalika Teej 2025: भारत में त्योहारों का मौसम आते ही हर तरफ रंग-बिरंगी रौनक देखने को मिलती है। तीज खासतौर पर सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास त्योहार माना जाता है। इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके भगवान शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगती हैं। सोलह श्रृंगारों में से एक है मेहंदी। तीज पर हाथों और पैरों में मेहंदी लगाने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसके पीछे धार्मिक मान्यताएं और वैज्ञानिक कारण हैं।
तीज त्योहारों पर मेहंदी लगाना केवल सजने-संवरने की परंपरा नहीं है, बल्कि यह धार्मिक आस्था, लोक परंपरा और वैज्ञानिक कारणों का संगम है। मेहंदी की खुशबू और रंग तीज के उत्सव को और भी खास बना देते हैं। यही वजह है कि आज भी तीज पर मेहंदी लगाए बिना सुहागिन महिलाओं का श्रृंगार अधूरा माना जाता है।
धार्मिक महत्व:
तीज पर मेहंदी का विशेष महत्व है। इसे वैवाहिक सुख और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जिस प्रकार देवी पार्वती ने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था, उसी प्रकार तीज पर मेहंदी लगाने वाली महिलाओं को भी अखंड सौभाग्य और लंबा वैवाहिक जीवन प्राप्त होता है। मेहंदी का लाल रंग शुभता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि मेहंदी केवल तीज पर ही नहीं, बल्कि शादी, करवा चौथ और अन्य शुभ अवसरों पर भी लगाई जाती है। कहा जाता है कि तीज पर मेहंदी लगाने से पति की आयु लंबी होती है और वैवाहिक जीवन सुखी रहता है।
लोक मान्यताएँ:
भारतीय समाज में मेहंदी को लेकर कई लोक मान्यताएँ प्रचलित हैं। ऐसा माना जाता है कि महिला की मेहंदी जितनी गहरी होती है, उसे अपने पति और ससुराल वालों से उतना ही अधिक प्यार मिलता है। कई जगहों पर तो यह भी माना जाता है कि मेहंदी लगाए बिना तीज और करवा चौथ जैसे व्रत अधूरे रहते हैं। कुछ जगहों पर तो यह भी परंपरा है कि तीज पर महिलाएं अपने ससुराल से अपनी बहुओं और बेटियों के लिए मेहंदी भेजती हैं। इसे सौभाग्य का वरदान और रिश्तों की मधुरता का प्रतीक माना जाता है।
वैज्ञानिक कारण:
मेहंदी का महत्व केवल परंपरा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं।
प्राकृतिक शीतलता: मेहंदी का सबसे बड़ा गुण शरीर को ठंडक पहुँचाना है। तीज अक्सर सावन-भाद्रपद की उमस भरी ऋतु में आती है। ऐसे में मेहंदी शरीर की गर्मी को कम करती है और नसों को आराम पहुँचाती है।
तनाव कम करना: हथेली और तलवों पर मेहंदी लगाने से नसों को आराम मिलता है। इससे मानसिक तनाव और थकान कम होती है।
एंटीसेप्टिक गुण: मेहंदी में औषधीय गुण होते हैं। यह हाथों और पैरों को संक्रमण और बैक्टीरिया से बचाती है।
स्वस्थ रंग: मेहंदी का प्राकृतिक रंग न केवल सुंदर दिखता है, बल्कि यह रसायन मुक्त भी होता है, इसलिए यह त्वचा के लिए सुरक्षित है।
भारतीय परंपरा में सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व है। इसे महिलाओं की सुंदरता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इन सोलह श्रृंगारों में मेहंदी को सबसे पवित्र और शुभ श्रृंगार माना जाता है। तीज पर मेहंदी लगाना सिर्फ श्रृंगार नहीं है, बल्कि यह पूजा और आस्था का भी अहम हिस्सा है।
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