धर्म-अध्यात्म

Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज पर फुलेरा बनाने में किन फूलों-पत्तियों का होता है प्रयोग,जानें महत्व

Sarita
26 Aug 2025 9:05 AM IST
Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज पर फुलेरा बनाने में किन फूलों-पत्तियों का होता है प्रयोग,जानें महत्व
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Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज के व्रत और पूजा में फुलेरा का विशेष महत्व है। फुलेरा बांधे बिना तीज की पूजा अधूरी मानी जाती है। फुलेरा फूलों और पत्तियों से बनाया जाता है और शिव-पार्वती की मूर्ति पर सजाया जाता है। इसमें इस्तेमाल होने वाले फूल और पत्ते न केवल धार्मिक दृष्टि से शुभ माने जाते हैं, बल्कि ये प्रकृति की प्रचुरता और देवी पार्वती की भक्ति का भी प्रतीक हैं। मान्यता है कि फुलेरा के दर्शन मात्र से ही शुभ फल प्राप्त होते हैं और वैवाहिक जीवन सुखी और समृद्ध होता है।
फुलेरा क्या है?
फुलेरा दरअसल फूलों और पत्तियों की पाँच लड़ियों से बना एक विशेष मंडप जैसा आभूषण है, जिसे शिव और माता पार्वती की मूर्ति या शिवलिंग पर लटकाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह भगवान शिव की पाँच पुत्रियों जया, विषहरा, शामिलबारी, देव और दोतली का प्रतीक है।
फुलेरा बनाने में प्रयुक्त फूल:
गेंदे के फूल - (पीला-नारंगी) शुभता और मंगल का प्रतीक
गुलाब - प्रेम और भक्ति का प्रतीक
चम्पा - सुगंध और सौंदर्य का प्रतीक
चमेली/मोगरा - पवित्रता और शांति का प्रतीक
कमल - लक्ष्मी और समृद्धि का प्रतीक
इन पाँच मुख्य फूलों से पाँच मालाएँ बनाई जाती हैं और उन्हें मंडप के ऊपर सजाया जाता है।
फुलेरा बनाने में प्रयुक्त पत्ते:
आम के पत्ते - दीर्घायु और सुख-समृद्धि के प्रतीक
अशोक के पत्ते - सौभाग्य और शांति के प्रतीक
केले के पत्ते - मंडप की सजावट और स्थिरता के प्रतीक
बाँस - शक्ति और स्थायित्व का प्रतीक
फूलों और पत्तियों का चयन क्यों विशेष है:
फूल और पत्तियां पूजा के दौरान वातावरण को शुद्ध करती हैं और दिव्यता बढ़ाती हैं। इन्हें न केवल सुंदरता के लिए, बल्कि आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक महत्व के कारण भी चुना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इन फूलों और पत्तियों से बने फुलेरा के दर्शन मात्र से ही वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है। तीज पर बाँधा जाने वाला फुलेरा सिर्फ़ सजावट का सामान नहीं, बल्कि भक्ति और आस्था का प्रतीक है। इसमें शामिल हर फूल और पत्ते का अपना महत्व है, जो शिव-पार्वती की पूजा को संपूर्ण बनाता है।
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